नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की वेबसाइट अब इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं है। वेबसाइट के अचानक बंद होने के बाद इसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वेबसाइट को जानबूझकर हटाया गया क्योंकि यह युवाओं की आवाज बन चुकी थी।
अभिजीत दिपके का दावा है कि उनकी वेबसाइट से करीब 10 लाख लोग जुड़े थे। इनमें बड़ी संख्या छात्रों और युवाओं की थी। दिपके के अनुसार, यह मंच युवाओं को मौजूदा व्यवस्था पर व्यंग्य और मीम्स के जरिए अपनी बात रखने का अवसर देता था।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सरकार कॉकरोचों से इतना क्यों डरती है? उनका कहना है कि वेबसाइट हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। दिपके ने यह भी दावा किया कि छह लाख लोगों ने NEET-UG विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए थे।
कॉकरोच जनता पार्टी का उदय सोशल मीडिया के जरिए हुआ। शुरुआत में इसे एक मजाकिया ट्रेंड माना गया, लेकिन धीरे-धीरे यह युवा इंटरनेट यूजर्स के बीच विरोध और असंतोष का प्रतीक बन गया। मीम संस्कृति और राजनीतिक व्यंग्य के मेल ने इसे तेजी से वायरल कर दिया।
NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में उठे विवाद के दौरान इस प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता और बढ़ गई। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर ऑनलाइन कैंपेन चलाए, जिनमें कॉकरोच जनता पार्टी भी सक्रिय दिखाई दी।
हालांकि, अभी तक वेबसाइट हटाए जाने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। न तो सरकार और न ही किसी संबंधित एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वेबसाइट तकनीकी कारणों से बंद हुई या किसी शिकायत के बाद कार्रवाई की गई।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे डिजिटल सेंसरशिप बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इंटरनेट अभियानों में जिम्मेदारी और तथ्यात्मक संतुलन भी जरूरी है।











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