वाशिंगटन, डी.सी. – अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने घोषणा की है कि अमेरिका और चीन जल्द ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सुरक्षा को लेकर बातचीत शुरू करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये चर्चा कब होंगी।
दोनों महाशक्तियों के बीच एआई तकनीक को लेकर बीते कुछ वर्षों में प्रतिस्पर्धा तेज रही है। अमेरिका और चीन दोनों इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए भारी निवेश कर रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों को इसके दुष्परिणामों और सुरक्षा खतरे को लेकर भी गंभीर चिंता है।
विश्लेषकों का मानना है कि एआई के बढ़ते विकास के साथ इसके दुरुपयोग की संभावना भी बढ़ गई है, जिससे दोनों देशों की चिंता स्वाभाविक है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि दोनों देश एआई तकनीकों के बेहतर नियंत्रण और नियमों के लिए वर्किंग ग्रुप स्थापित कर सकते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका एआई से उत्पन्न खतरों को रोकने के लिए सतर्क कदम उठा रहा है, लेकिन चीन भी अपनी तेजी से विकसित होती एआई क्षमताओं को धीमा करने को तैयार नहीं है। विश्वसनीय स्रोतों ने बताया कि इस असहमति के बावजूद दोनों देश बातचीत के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण रख रहे हैं।
बेसेन्ट ने संवाद को एक कदम बताते हुए कहा कि “यह ज्ञात नहीं है कि इन बातों का समय कब आएगा, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम जोखिमों को समझें और उन पर नियंत्रण पाने के लिए काम करें।”
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा स्थिरता के लिए एआई सुरक्षा बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि संयुक्त प्रयासों से ही एआई के संकटों को टाला जा सकता है।
एआई का विकास तेजी से हो रहा है, और इस तकनीक के सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक प्रभाव व्यापक हैं। इसलिए अमेरिका और चीन के बीच इस बातचीत को सफलता मिलने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों को और पूरी दुनिया को आने वाले खतरों से बचाया जा सके।











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