तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका के साथ जारी कूटनीतिक गतिरोध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देशवासियों को एकजुट रहने का संदेश दिया है। इमाम खुमैनी की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित समारोह में पढ़े गए अपने संदेश में उन्होंने राष्ट्रीय एकता, दृढ़ता और सतर्कता को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
खामेनेई ने कहा कि ईरान को कमजोर करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यदि जनता और नेतृत्व के बीच विश्वास कायम रहा तो कोई भी शक्ति देश के खिलाफ अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सकेगी। उनका यह संदेश ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।
“दुश्मन की बातों से सावधान रहने की जरूरत”
संदेश में खामेनेई ने कहा कि देश के नागरिकों को विरोधियों के प्रचार और दुष्प्रचार से सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और राजनीतिक जागरूकता से भी होती है।
उन्होंने कहा कि ईरानी जनता ने पिछले दशकों में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और हर बार अपनी एकजुटता के बल पर कठिन परिस्थितियों को पार किया है। यही भावना आज भी देश की सबसे बड़ी ताकत है।
इमाम खुमैनी की विरासत को किया याद
तेहरान में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के दौरान पढ़े गए संदेश में खामेनेई ने इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी को याद करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा आज भी ईरान के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का आधार बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इमाम खुमैनी ने ईरानी जनता को आत्मनिर्भरता, स्वतंत्रता और आत्मविश्वास का रास्ता दिखाया था, जिसे आगे बढ़ाना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
इजराइल को लेकर दोहराया अपना रुख
अपने संदेश में खामेनेई ने इजराइल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात तेजी से बदल रहे हैं और क्षेत्रीय राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।
हालांकि उन्होंने किसी संभावित घटनाक्रम का सीधा उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान को क्षेत्र में जारी तनाव और शक्ति संतुलन के संदर्भ में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश ईरान की लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय नीति के अनुरूप है।
अमेरिका के साथ बातचीत में नहीं निकला समाधान
अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों तक पहुंच जैसे मुद्दे अब भी विवाद की मुख्य वजह बने हुए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने बातचीत में आगे बढ़ने के लिए अपनी जमी हुई संपत्तियों पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की है। वहीं अमेरिकी प्रशासन इस विषय पर कोई जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है।
ट्रंप के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि यदि अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ किसी हमले में ईरान की प्रत्यक्ष भूमिका साबित होती है तो अमेरिका अपनी रणनीति की समीक्षा कर सकता है।
हालांकि, रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन फिलहाल व्यापक युद्ध से बचना चाहता है और किसी बड़े सैन्य संघर्ष के बजाय सीमित स्तर पर तनाव को नियंत्रित रखने के पक्ष में है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल बाजार, समुद्री व्यापार मार्ग और पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से खामेनेई का यह संदेश केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे क्षेत्रीय रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की गतिविधियों पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी रहेगी।










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