कोलकाता, पश्चिम बंगाल – बांग्लादेश में खसरे के मामलों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने भारत के लिए गंभीर चेतावनी जारी कर दी है। देश की लंबी और कई स्थानों पर सक्रिय तथा पारगम्य सीमा को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस बीमारी की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखनी होगी।
बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप का मुख्य कारण कम टीकाकरण क्षेत्र हैं, जहाँ लोगों को पर्याप्त टीके नहीं लगे हैं। ऐसे इलाकों में जब यह बीमारी प्रवेश करती है, तो यह तेजी से फैलती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सिर्फ बीमारी का बाहर से आना राष्ट्रीय संकट नहीं बनाता, बल्कि यह तब बड़ा खतरा बन जाता है जब यह उन संकुलों या समूहों में फैलती है जहाँ लोगों का टीकाकरण स्तर कम होता है।
भारत और बांग्लादेश की सीमा लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी है और कई भागों में यह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। इससे बीमारी के संचरण का खतरा बढ़ जाता है। पूर्वी भारत के कई राज्यों में भी टीकाकरण की दर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है, इसलिए यहां खसरे का संक्रमण फैलने की संभावना बनी रहती है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीमा के पास के इलाकों में मासिक टीकाकरण शिविरों का आयोजन और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि इस महामारी को फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा, सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है जिससे संक्रमण की चेन टूटी जा सके।
खसरा एक संक्रामक रोग है जो खासतौर पर बच्चो का स्वास्थ्य प्रभावित करता है। यह खांसी, बुखार, नाक बहना और चकत्तों के रूप में प्रकट होता है। यदि ठीक समय पर इलाज और टीकाकरण न किया जाए, तो यह जटिलताओं का कारण बन सकता है।
भारत सरकार ने भी इस संदर्भ में जोर दिया है कि सभी राज्यों को टीकाकरण कार्यक्रम को तेज करना होगा और विशेषकर उन इलाकों पर ध्यान देना होगा जो सीमा के काफी करीब हैं। इसके अतिरिक्त, संक्रमण के शुरुआती लक्षण होने पर तुरंत पहचान और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करानी होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने आज ही इस मुद्दे पर सतर्कता नहीं बढ़ाई, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए, सीमावर्ती राज्यों को खसरे और अन्य संक्रामक रोगों के खतरे को लेकर अधिक सतर्क और सक्रिय रहना होगा।











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