Monday, October 26, 2026 1 live visitors
D/DNA News D/DNA Newsddnanews.com
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
विज्ञापन
DDNA header banner
DDNA header banner
भारत का नया समुद्री दांव: ग्रेट निकोबार से बदलेगा हिंद महासागर का समीकरण, चीन की बढ़ सकती हैं रणनीतिक चुनौतियां

भारत का नया समुद्री दांव: ग्रेट निकोबार से बदलेगा हिंद महासागर का समीकरण, चीन की बढ़ सकती हैं रणनीतिक चुनौतियां

D
D/DNA News Desk 4 जून 2026, 13:28 IST
4 मिनट पढ़ें 1
भारत का नया समुद्री दांव: ग्रेट निकोबार से बदलेगा हिंद महासागर का समीकरण, चीन की बढ़ सकती हैं रणनीतिक चुनौतियां

नई दिल्ली: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक मुकाबले के बीच भारत ने एक ऐसी परियोजना पर दांव लगाया है, जिसे आने वाले दशकों में देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और आर्थिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा मंजूर 9 अरब डॉलर का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट न केवल भारत की समुद्री क्षमताओं को नई मजबूती देगा, बल्कि एशिया के रणनीतिक परिदृश्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी छोर पर स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखता है। यह क्षेत्र मलक्का जलडमरूमध्य के निकट है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना?

सरकार की योजना के तहत ग्रेट निकोबार में एक अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, नागरिक एवं सैन्य उपयोग वाला हवाई अड्डा, ऊर्जा अवसंरचना, पर्यटन सुविधाएं और एक आधुनिक टाउनशिप विकसित की जाएगी। लगभग 166 वर्ग किलोमीटर में फैली इस परियोजना का उद्देश्य द्वीप को एक प्रमुख समुद्री और आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

परियोजना का पहला चरण 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार किया जाएगा।

मलक्का स्ट्रेट और चीन की निर्भरता

मलक्का जलडमरूमध्य हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है। चीन के लिए इसका महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि उसके तेल आयात और समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन लंबे समय से इस मार्ग पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक समुद्री और स्थलीय मार्ग विकसित करने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद मलक्का स्ट्रेट आज भी उसकी आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

यही कारण है कि इस क्षेत्र के निकट भारत की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी को चीन गंभीरता से देखता है। हालांकि भारत ने कभी भी किसी समुद्री मार्ग को बाधित करने की नीति का समर्थन नहीं किया है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन की दृष्टि से यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत को कैसे होगा फायदा?

ग्रेट निकोबार परियोजना का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ यह होगा कि भारत को विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में बड़ी मात्रा में भारतीय कंटेनर कोलंबो, सिंगापुर और अन्य विदेशी बंदरगाहों के माध्यम से संचालित होते हैं।

गहरे पानी का नया बंदरगाह बनने के बाद बड़े कंटेनर जहाज सीधे भारत में रुक सकेंगे। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, शिपिंग और बंदरगाह सेवाओं से जुड़ा राजस्व भी देश के भीतर ही रहेगा।

सुरक्षा और निगरानी क्षमता होगी मजबूत

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेट निकोबार में विकसित होने वाला बुनियादी ढांचा भारत को समुद्री क्षेत्र की निगरानी और रणनीतिक जागरूकता के मामले में बड़ी बढ़त दे सकता है। हिंद महासागर से गुजरने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ने से राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

भारत पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में ग्रेट निकोबार परियोजना इस रणनीति को और प्रभावी बना सकती है।

पर्यावरणीय बहस भी जारी

जहां सरकार और रणनीतिक विशेषज्ञ इस परियोजना को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, वहीं पर्यावरणविदों ने इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की है। ग्रेट निकोबार जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है और यहां कई दुर्लभ प्रजातियां तथा आदिवासी समुदाय निवास करते हैं।

आलोचकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियों से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है। हालांकि सरकार का दावा है कि सभी पर्यावरणीय मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

भारत की समुद्री महत्वाकांक्षा का प्रतीक

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट केवल एक बंदरगाह या टाउनशिप निर्माण योजना नहीं है। यह भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करना चाहता है।

यदि परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में ग्रेट निकोबार भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर प्रदान कर सकता है।

यह खबर शेयर करें

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।

संबंधित खबरें

--:--
ईरान युद्ध अपडेट: ट्रम्प ने ईरान हमलों को तेज करने पर कैबिनेट के साथ की बैठकJENPAS UG परिणाम 2026 घोषित, wbjeeb.nic.in पर उपलब्ध; Rank Card डाउनलोड करें, काउंसलिंग शेड्यूल जल्द घोषित होगाबर्मिंघम फीनिक्स ने एडगबास्टन में ट्रेंट रॉकेट्स को पछाड़ाजेम्स ज़ी ने अपने बेटे होने का दावा करने वाले व्यक्ति की गॉडमदर से $119,000 वापस लेने की कोशिश कीअमेरिका ने व्यापार भागीदारों पर नई टैरिफ लहर लागू कीऑस्मानिया विश्वविद्यालय ने मई 2026 के यूजी CBCS नियमित और बैकलॉग परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए; यहां से डाउनलोड करेंसीए प्रमुख ग्रीनबर्ग भारत में इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट को लेकर ‘खुले’‘जन नायक’ ने बॉक्स ऑफिस पर किया जोरदार आगाज