Monday, October 26, 2026 1 live visitors
D/DNA News D/DNA Newsddnanews.com
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
विज्ञापन
DDNA header banner
DDNA header banner
भारत नई दवाओं की खोज में कहां कर रहा है गलतियां

भारत नई दवाओं की खोज में कहां कर रहा है गलतियां

D
D/DNA News Desk 21 अप्रैल 2026, 05:10 IST
1 मिनट पढ़ें
भारत नई दवाओं की खोज में कहां कर रहा है गलतियां

नई दिल्ली, भारत – नई दवाओं की खोज में सफलता पाने के लिए किसी भी रोग की मूल जैविकी (biological) को समझना अत्यंत आवश्यक होता है। हालांकि यह बात सभी देशों के लिए समान है, भारत इस दिशा में अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने में भीखचूक रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि भारत में रोगों की मूल जैविकी को समझने वाले शोधों में महत्वपूर्ण खामियां हैं।

सबसे पहली समस्या यह है कि भारत में बायोलॉजिकल डेटा के लिए पश्चिमी देशों पर अत्यधिक निर्भरता है। कई बार भारतीय रोगियों की जेनेटिक संरचना और पर्यावरणीय कारक पश्चिमी देशों से पूरी तरह मेल नहीं खाते, जिससे वहां के डेटा को सीधे भारत पर लागू करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता। इस तथ्य के कारण भारत में नई दवाओं के विकास में बाधाएं आती हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रख पाते।

दूसरी बड़ी समस्या है देश में मौलिक बुनियादी शोध (basic research) के लिए पर्याप्त समर्थन का अभाव। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर ऐसे शोधों को वित्तीय सहायता मिलने में बाधाएं और अनियमितताएं देखने को मिलती हैं, जिनका असर नई दवाओं की खोज को धीमा कर देता है। इससे न केवल शोधकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि शोध की गुणवत्ता और गहराई पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि भारतीय जैव चिकित्सा अनुसन्धान को अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थायी और व्यापक रणनीतियों की आवश्यकता है। इसमें स्थानीय समुदायों से डेटा एकत्र करना, देश की अपनी आनुवंशिक विविधता को समझना और सरकारी व निजी क्षेत्र से शोध को पर्याप्त बजट देना शामिल है। इन प्रयासों से भारत में नई दवाओं की खोज की प्रक्रिया अधिक गति पकड़ सकती है, जिससे नई बीमारियों के उपचार की दिशा में सहायक प्रौद्योगिकी विकसित हो सकेगी।

सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं को चाहिए कि वे भारतीय शोधकर्ताओं को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराएं और पश्चिमी देशों के डेटा पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ देश में अपनी जैविक समझ को बढ़ावा दें। यदि इन चुनौतियों का समुचित समाधान किया गया तो भारत वैश्विक दवा अनुसंधान में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है और देश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकता है।

यह खबर शेयर करें

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।

संबंधित खबरें

--:--
ईरान युद्ध अपडेट: ट्रम्प ने ईरान हमलों को तेज करने पर कैबिनेट के साथ की बैठकJENPAS UG परिणाम 2026 घोषित, wbjeeb.nic.in पर उपलब्ध; Rank Card डाउनलोड करें, काउंसलिंग शेड्यूल जल्द घोषित होगाबर्मिंघम फीनिक्स ने एडगबास्टन में ट्रेंट रॉकेट्स को पछाड़ाजेम्स ज़ी ने अपने बेटे होने का दावा करने वाले व्यक्ति की गॉडमदर से $119,000 वापस लेने की कोशिश कीअमेरिका ने व्यापार भागीदारों पर नई टैरिफ लहर लागू कीऑस्मानिया विश्वविद्यालय ने मई 2026 के यूजी CBCS नियमित और बैकलॉग परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए; यहां से डाउनलोड करेंसीए प्रमुख ग्रीनबर्ग भारत में इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट को लेकर ‘खुले’‘जन नायक’ ने बॉक्स ऑफिस पर किया जोरदार आगाज