नई दिल्ली, भारत
देश की नागरिक उड्डयन प्राधिकरण यानी डीजीसीए ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत उन यात्रियों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया गया है जो युगांडा और कांगो से आ रहे हैं या जिनका इन देशों के माध्यम से ट्रांजिट हो रहा है। ये निर्देश इबोला वायरस को फैलने से रोकने के लिए जारी किए गए हैं।
डीजीसीए ने बताया कि इन देशों से आने वाले या इनके रास्ते आने वाले यात्रियों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और यात्रा विवरण की पूरी जानकारी देनी होगी। समय पर यह फॉर्म भरवाने से संक्रमण के फैलाव को रोका जा सकेगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
साथ ही, डीजीसीए ने एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि वे यात्रियों की जानकारी सही तरीके से इकट्ठा करें और स्वास्थ्य मंत्रालय से साझा करें। इसके अलावा, एयरपोर्ट पर भी यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया कड़ी कर दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस एक गंभीर संक्रामक रोग है जो जल्दी संक्रमण फैलाने की क्षमता रखता है। इसलिए समय पर इस तरह के कदम बेहद जरूरी हैं। भारत सरकार भी लगातार इस समस्या पर नजर बनाए हुए है और मामलों को नियंत्रण में रखने के प्रयास कर रही है।
यात्रीगण खुद भी सतर्क रहने के लिए प्रोत्साहित किए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध लक्षण को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल सके। संक्रमण के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने के लिए भारत सरकार विभिन्न माध्यमों से लोगों तक जानकारी पहुंचा रही है।
डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम सभी एयरलाइंस और यात्रियों से अनुरोध करते हैं कि वे इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करें ताकि हम इस घातक बीमारी को भारत में प्रवेश करने से रोक सकें।” उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई यात्री फॉर्म भरने में कोई भी तथ्य छिपाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस दिशा में और भी तगड़ा कदम उठाने के लिए सरकार ने आगामी समय में और सख्त नियम लागू करने की योजना बनाई है। यात्रियों से अपेक्षा है कि वे सभी नीतियों का सम्मान करें और अपनी तथा समाज की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।
इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि इबोला वायरस के भारत में फैलाव को रोका जा सकेगा और यात्रियों के लिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सकेगी।











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