नई दिल्ली, भारत – भारत सरकार के प्रमुख बीमा कार्यक्रम, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत सर्जिकल प्रक्रियाओं के दौरान मरीजों के फोटो लेने का नियम लागू है। हालांकि, इस नियम के साथ-साथ मरीजों की सहमती, नैतिकता और सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से मरीजों की गोपनीयता और गरिमा को जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य देश के कमजोर वर्ग के लिए सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। इसके तहत Hospitalization और सर्जिकल प्रक्रियाओं के खर्च की भरपाई की जाती है। धोखाधड़ी को रोकने के लिए मरीजों की सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान फोटो लेना अनिवार्य किया गया है ताकि अस्पतालों द्वारा की जा रही गलत प्रथाओं पर काबू पाया जा सके।
हालांकि, इस नियम के तहत मरीजों से कोई स्पष्ट सहमति लिए बिना उनके चित्र लिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे मरीजों को अपनी निजता और गरिमा की हानि होने का खतरा रहता है। चिकित्सा क्षेत्र में नैतिकता के मानदंडों के अनुसार मरीज की सहमति एवं गोपनीयता सर्वोपरि होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उचित सुरक्षा और सहमति के मरीजों की तस्वीरें लेने का अभ्यास गंभीर आचरणहीनता मानी जानी चाहिए।
स्वास्थ्य अधिकार संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस पहलू पर नियमों को स्पष्ट और कड़ा किया जाए ताकि मरीजों की निजता का उल्लंघन न हो। साथ ही, मरीजों की सहमति और उनकी तस्वीरों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएं। योगय प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी चिकित्सकों व अस्पताल स्टाफ के लिए आवश्यक हैं ताकि वे मरीजों के अधिकारों का पूरा सम्मान करें।
अक्सर गरीब और असमर्थ मरीज इस दुविधा में फंसते हैं क्योंकि वे बेहतर इलाज पाने के लिए मजबूर होते हैं और नियम के तहत फोटो खिंचवाना उनकी मजबूरी बन जाता है। इसके साथ ही, मेडिकल डेटा की सुरक्षा के प्रति भी सरकार को अधिक सतर्कता बरतनी होगी। बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के मरीजों की तस्वीरों को किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल किए जाने का जोखिम बना रहता है।
सरकारी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कहा है कि वे मरीजों की गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और जल्द ही इस विषय पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेंगे। मंत्रालय का कहना है कि धोखाधड़ी रोकने और मरीजों का सम्मान बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
आखिरकार, चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी सुधारों के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पालन भी जरूरी है। मरीज की गरिमा और अधिकारों का सम्मान किए बिना किसी नियम का क्रियान्वयन संभव नहीं है। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की सुरक्षा, सहमति और गोपनीयता से जुड़े नियमों में सुधार से न केवल धोखाधड़ी पर नियंत्रण होगा बल्कि मरीजों के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा।











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