अमरावती, आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश में 2026 के इंटरमीडिएट (इंटर) परिणामों ने छात्र-छात्राओं की बढ़ती सफलता दर को फिर से साबित किया है। इस वर्ष, पहली वर्ष की परीक्षा में 77% छात्र उत्तीर्ण हुए जबकि दूसरी वर्ष में यह प्रतिशत 81% दर्ज किया गया। ये परिणाम लगभग चार लाख उम्मीदवारों की परीक्षा के विषय में हैं जिनमें सामान्य और व्यावसायिक दोनों स्ट्रीम शामिल हैं।
पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंटर पास प्रतिशत में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। 2019 में पास प्रतिशत मात्र 59% था, जो 2026 तक बढ़कर 81% तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ने का परिणाम है।
सरकारी जूनियर कॉलेजों की प्रदर्शन दर निजी कॉलेजों की तुलना में थोड़ी कम रही, जहां सरकारी कॉलेजों का औसत पास प्रतिशत कुल औसत से नीचे रहा। विशेष रूप से कृष्णा जिले ने पूरे प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है जबकि अन्नामय्या जिला इस बार सबसे कम प्रदर्शन दर्ज करने वाला रहा है।
विद्यालयों ने तथा शिक्षा विभाग ने छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन, पुन: जांच तथा सप्लीमेंट्री परीक्षाओं की भी व्यवस्था की है ताकि हर छात्र को पास होने का मौका मिले और उनकी मेहनत व्यर्थ न जाए। इसके तहत जिन विद्यार्थियों को अपनी परीक्षा परिणाम पर संदेह हो, वे पुनर्मूल्यांकन या पुन: जांच के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है ताकि उनकी डिग्री पर कोई विवाद न रहे।
एसोसिएशन ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन ने इस सफलता को बड़े पैमाने पर छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों की मेहनत का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि यह बढ़िया रिजल्ट प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता में निरंतर सुधार का संकेत है। वे आगे भी शिक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने और छात्रों की बेहतर सफलता के लिए प्रयास जारी रखेंगे।
अंततः, आंध्र प्रदेश के ये परिणाम संकेत देते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार और विभिन्न हितधारकों की संयुक्त पहल से सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। आने वाले वर्षों में और भी प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है जिससे प्रदेश का शैक्षिक स्तर और ऊंचा होगा।











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