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हैदराबाद: शहरी विस्तार के कारण साँपों की बढ़ती हुई रेस्क्यू घटनाओं पर अध्ययन

हैदराबाद: शहरी विस्तार के कारण साँपों की बढ़ती हुई रेस्क्यू घटनाओं पर अध्ययन

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D/DNA News Desk 8 मई 2026, 18:20 IST
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हैदराबाद: शहरी विस्तार के कारण साँपों की बढ़ती हुई रेस्क्यू घटनाओं पर अध्ययन

हैदराबाद, तेलंगाना। हाल ही में एक अध्ययन में पहली बार सायनंथ्रोपाइजेशन की प्रक्रिया का वैज्ञानिक सबूत सामने आया है, जिसमें साँपों ने मानव परिवर्तित वातावरण के अनुसार अपने आप को अनुकूलित कर लिया है। इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता ने बताया कि अर्बन विस्तार के कारण साँप अब शहरों के करीब अधिक संख्या में दिखाई देते हैं और उन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन बढ़े हैं।

सांपों का पारंपरिक रूप से जंगली और मानव से दूर रहने वाला माना जाता था, लेकिन इस नवीनतम शोध ने साबित किया कि वे धीरे-धीरे मानव आवास के पास रहने और अनुकूलित होने लगे हैं। शहरों में भारी आबादी, निर्माण कार्यों और हरित क्षेत्र के लगातार सिकुड़ने से साँपों के लिए आवास सीमित हो गया है, जिससे वे इंसानी इलाके में प्रवेश कर रहे हैं।

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि शहरी वातावरण में पाए जाने वाले साँपों में शारीरिक और व्यवहारिक परिवर्तन देखे गए हैं, जो उनमें जीवित रहने की क्षमता बढ़ा रहे हैं। इनके व्यवहार में बदलाव ने उनके लिए नए पर्यावरण में भोजन खोजना और खतरे से बचना संभव बनाया है।

शोधकर्ता ने कहा, “यह पहला ठोस प्रमाण है कि साँप जैसे जंगली प्राणी मानव द्वारा परिवर्तित वातावरण में खुद को ढाल रहे हैं। यह पर्यावरण और जीवविज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खोज है, जो हमें शहरी पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर समझने में मदद करेगी।”

स्थानीय वन विभाग और संरक्षण संगठनों ने भी इस अध्ययन को काफी महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि शहरी इलाकों में साँपों के बढ़ते संपर्क को ध्यान में रखते हुए लोगों को जागरूक करने और उचित सुरक्षा नियम लागू करने की आवश्यकता है, ताकि इंसान और साँप दोनों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाया जा सके।

नगर निगम के अधिकारी भी इस बढ़ती समस्या को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में साँपों के रेस्क्यू मामलों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इसलिए शहर में वन्यजीव बचाव केंद्रों की संख्या बढ़ाने और स्थानीय अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास को पर्यावरण के साथ संतुलित बनाना नितांत आवश्यक है। इस अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानव गतिविधियाँ सीधे तौर पर वन्यजीवों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं, और इसके प्रति सजग रहना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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