तेहरान, ईरान – ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने यूरेनियम समृद्धिकरण को पाँच साल तक निलंबित करने की पेशकश की है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने 20 वर्षों की अवधि पर जोर दिया है। दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों के प्रसार को लेकर जारी वार्ता में मुख्य विवाद इस अवधि को लेकर है।
ईरान ने यह प्रस्ताव तब दिया जब वैश्विक समुदाय की नजरें इस क्षेत्र में बढ़ती तनाव और अस्थिरता पर टिकी हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और विश्व शांति को बनाए रखना है, किंतु उनके लिए परमाणु क्षमता बनाये रखना भी राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वहीं, अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि कम अवधि की परमाणु प्रतिबंध योजना अस्वीकार्य है, क्योंकि इससे ईरान को भविष्य में हथियार निर्माण की सुविधा हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि 20 वर्षों की अवधि एक स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम होगा।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है, हालांकि दोनों तरफ से कूटनीतिक प्रयास फिलहाल जारी हैं। हाल के हफ्तों में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, जिसमें विभिन्न परमाणु प्रस्तावों पर चर्चा हुई। वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञ इस गतिरोध को गंभीरता से देख रहे हैं और आशा जता रहे हैं कि दोनों पक्ष सहमति तक पहुंचेंगे।
ईरान ने पूर्व में अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद समृद्धिकरण जारी रखा है। इस कारण कई बार अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निंदा का सामना करना पड़ा है। अब इस नए प्रस्ताव के बाद ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में स्थिति स्पष्ट होगी कि ईरान कितनी हद तक अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल तकनीकी या वैज्ञानिक नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक और सैन्य शक्ति प्रदर्शन का भी मामला है। अमेरिका की ओर से ऊँची अवधि की मांग और ईरान की कम अवधि की पेशकश के बीच संतुलन बनाना जरूरी है ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कहा है कि वे इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और दोनों देशों से जल्द से जल्द सर्वसम्मति की उम्मीद जताई है। इसके अलावा, कई यूरोपीय और एशियाई देश भी मध्यस्थता के प्रयासों में लगे हुए हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो, ईरान ने पांच साल के लिए यूरेनियम समृद्धिकरण निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि अमेरिकी प्रशासन अभी भी 20 वर्ष की अवधि पर डटा हुआ है। यह विषय आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बना रहेगा।











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