बैंकॉक, थाईलैंड – थाईलैंड में पुरुषों के लिए अनिवार्य सैन्य ड्राफ्ट (ड्राफ्टिंग) मुद्दा लंबे समय से देश में विभाजनकारी रहा है। देश में ड्राफ्ट सिस्टम को लेकर सामाजिक और राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं, परन्तु हाल के वर्षों में राष्ट्रीयता की भावना के बढ़ने और अर्थव्यवस्था की सुस्ती के चलते स्वयंसेवी भर्ती में तेजी आई है।
थाईलैंड में सैन्य सेवा के लिए ड्राफ्ट प्रणाली 1939 से लागू है, जिसके तहत 21 वर्ष के पुरुषों को यादृच्छिक आधार पर लाल कार्ड या काला कार्ड दिया जाता है। लाल कार्ड पाने वाले युवक को सेना में सेवा देनी होती है, जबकि काला कार्ड पाने वाले बिना सेवा के मुक्त हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को देश में ‘सैन्य लॉटरी’ कहा जाता है।
विभिन्न समूहों की प्रतिक्रियाएँ इस ड्राफ्ट को लेकर मिश्रित हैं। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय कर्तव्य मानते हैं, वहीं कई युवा इसे एक बाधा और उनके करियर की राह में एक निरंतर विवाद का कारण समझते हैं। इसके साथ ही, थाईलैंड की राजनीति में भी इसका महत्व बरकरार है क्योंकि सेना देश की राजनीति में एक मजबूत शक्ति है।
हालांकि, राष्ट्रीयता की भावना के बढ़ने से स्वयंसेवक युवा सेना में शामिल होने के लिए आगे आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में रोजगार की कमी और आर्थिक मंदी के कारण युवाओं में सैन्य सेवा एक स्थिर विकल्प के रूप में उभरी है। इससे सैन्य बलों को मजबूती मिली है और देश की सीमाओं की सुरक्षा भी बेहतर हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, थाईलैंड में ड्राफ्ट व्यस्था को समय-समय पर सुधार की आवश्यकता है ताकि इसे अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके। साथ ही, युवा वर्ग की अपेक्षाओं को समझते हुए उनका मनोबल बढ़ाने और उनके हितों की रक्षा करना अनिवार्य है।
थाईलैंड सरकार भी इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि सैन्य सेवा को एक सम्मानजनक और आकर्षक विकल्प बनाया जा सके, जिससे देश की सुरक्षा और युवा विकास दोनों सुनिश्चित हो सकें।











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