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नसीरुद्दीन ने बॉलीवुड की सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर मौन की कड़ी निंदा की

नसीरुद्दीन ने बॉलीवुड की सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर मौन की कड़ी निंदा की

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D/DNA News Desk 23 जुलाई 2026, 09:10 IST
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नसीरुद्दीन ने बॉलीवुड की सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर मौन की कड़ी निंदा की

मुंबई, महाराष्ट्र – बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन पर बॉलीवुड के चुप्पी साधे रहने को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने उन कलाकारों की तुलना एक ऐसे कुत्ते से की जो हड्डी तो पकड़े हुए है लेकिन भौंक नहीं सकता। इस छलनी सन्नाटा न केवल सामाजिक न्याय के सवालों पर उनकी बेचैनी को दर्शाता है बल्कि गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर चुप्पी रखकर हालात को और खराब करने जैसा है।

नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वे प्रदर्शन कर रहे छात्रों का साथ देते नजर आए। इस वीडियो में उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “सब याद रखा जाएगा,” जो यह दर्शाता है कि वे न केवल छात्रों के हक में हैं बल्कि इस आंदोलन को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। इससे यह भी जाहिर होता है कि वे न्याय और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के पक्ष में हैं।

जबकि बहुत से बॉलीवुड कलाकार इस संवेदनशील विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं, कुछ कलाकार जैसे शबाना आज़मी और रितेश देशमुख ने खुलकर शिरोधार्य दिया है। शबाना आज़मी, जो अपनी सामाजिक सक्रियता के लिए जानी जाती हैं, ने छात्रों के अधिकारों की आवाज़ उठाई और विरोध को समर्थन दिया। रितेश देशमुख भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स में प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति सहानुभूति जता चुके हैं।

नसीरुद्दीन शाह की आलोचना और कुछ सितारों का समर्थन इस बात को दर्शाता है कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर कलाकारों के बीच भी एक बड़ा वैचारिक मतभेद मौजूद है। बॉलीवुड के कुछ हिस्से ने अपनी चुप्पी से विवाद को जटिल बनाया है, जबकि अन्य ने हिम्मत दिखाकर अपनी बात रखी है। इस स्थिति में बॉलीवुड की भूमिका पर बहस तेज हो रही है कि क्या कलाकारों को ऐसे राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय व्यक्त करनी चाहिए?

विश्लेषकों का मानना है कि कलाकारों का मौन सामाजिक जिम्मेदारी की कमी को दर्शाता है। वे कह रहे हैं कि सार्वजनिक हस्तियां, जिनका बड़ा प्रभाव होता है, उन्हें संवेदनशील मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए ताकि आम जनता भी जागरूक हो सके और एक स्वस्थ लोकतंत्र को बढ़ावा मिले।

यह मामला बॉलीवुड की सामाजिक भूमिका पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है और यह देखना होगा कि भविष्य में कलाकार कैसे ऐसे आंदोलनों में अपनी जगह बनाएंगे। फिलहाल, नसीरुद्दीन शाह का यह बयान आंदोलन के समर्थन में एक स्पष्ट संदेश के रूप में स्वीकार किया जा रहा है जो बॉलीवुड के कुछ हिस्सों में बदलाव की गुंजाइश भी दिखाता है।

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