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सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने नियमो के खिलाफ बिजली के खम्बो पर लगाए सूरजकुंड के विज्ञापन

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने नियमो के खिलाफ बिजली के खम्बो पर लगाए सूरजकुंड के विज्ञापन

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D/DNA News Desk 2 फ़रवरी 2026, 10:21 IST
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सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने नियमो के खिलाफ बिजली के खम्बो पर लगाए सूरजकुंड के विज्ञापन

फरीदाबाद (धर्मराज/तरुण अरोड़ा): सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले के नाम पर शहर में जो हो रहा है, वह अब प्रचार नहीं, बल्कि कानून की खुली अवहेलना बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की तस्वीरों वाले प्रचार बोर्ड बिजली के पोलों पर धड़ल्ले से लगाए जाने के बाद जन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग सीधे विवाद के केंद्र में आ गया है।
स्थानीय नागरिकों ने इसे सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग, विद्युत सुरक्षा से खिलवाड़ और सत्ता के नाम पर नियमों की अनदेखी बताते हुए नगर निगम और बिजली बोर्ड में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में साफ कहा गया है कि जिन पोलों से शहर की बिजली व्यवस्था जुड़ी है, उन्हीं पर भारी बोर्ड टांगना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
कानून सवालों के घेरे में, अनुमति किसकी?
शिकायतकर्ताओं ने सीधे सवाल उठाए हैं—
नगर निगम और बिजली बोर्ड की अनुमति के बिना यह प्रचार किसके आदेश पर हुआ?
संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की तस्वीरों का इस तरह उपयोग क्या सरकारी प्रचार नियमों के अनुरूप है?
सूत्रों के अनुसार, शिकायत दर्ज होते ही नगर निगम और बिजली बोर्ड हरकत में आ गए हैं और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। नियम उल्लंघन की पुष्टि होने पर बोर्ड हटाने, जुर्माना लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तक की तैयारी है।
एक के बाद एक विवाद, सूरजकुंड मेला सवालों के घेरे में
गौरतलब है कि सूरजकुंड मेला पहले ही प्रेस कार्ड विवाद, पुलिस के रहने-खाने की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। अब प्रचार बोर्डों का यह मामला पूरे आयोजन की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा रहा है।
शहर में चर्चा है कि अगर यही नियम आम नागरिक तोड़े, तो कार्रवाई तुरंत होती है—फिर सरकारी विभाग पर अलग कानून क्यों?क्या कहता है कानून? बिजली के पोल सार्वजनिक संपत्ति बिजली के पोल विद्युत अधिनियम व बिजली बोर्ड के नियमों के तहत केवल विद्युत आपूर्ति के लिए आरक्षित होते हैं। उन पर किसी भी प्रकार का बोर्ड, बैनर या पोस्टर लगाना सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
▪ अनुमति के बिना बोर्ड अवैध नगर निगम और संबंधित बिजली वितरण कंपनी की लिखित अनुमति के बिना बिजली के पोलों पर कोई भी प्रचार सामग्री लगाना गैरकानूनी है। नियमों के अनुसार ऐसी सामग्री तत्काल हटाई जा सकती है।
▪ विद्युत सुरक्षा से खिलवाड़ भारी बोर्ड या फ्लेक्स लगाने से पोल कमजोर हो सकता है, तारों पर दबाव पड़ सकता है, करंट लगने व हादसे की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण बिजली विभाग ऐसे कृत्य पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखता है।
▪ सार्वजनिक संपत्ति दुरुपयोग का मामला बिना अनुमति सरकारी या निजी प्रचार सामग्री लगाना सार्वजनिक संपत्ति विरूपण अधिनियम के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें जुर्माना व हटाने की कार्रवाई तय है।
▪ सरकारी प्रचार के नियम भी लागू सरकारी योजनाओं या आयोजनों के प्रचार में निर्धारित स्थानों का ही उपयोग किया जा सकता है,
संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की तस्वीरों का उपयोग नियमबद्ध दिशा-निर्देशों के तहत ही किया जा सकता है।
नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय होती है।

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