
फरीदाबाद (धर्मराज/तरुण अरोड़ा):सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला इस बार केवल कला, संस्कृति और हस्तशिल्प के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्थाओं, पक्षपात और कथित मनमानी के कारण भी सुर्खियों में रहेगा। प्रेस कार्ड वितरण को लेकर उठे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि अब सूरजकुंड मेले की चमक-दमक के पीछे छिपी हर खामी को उजागर करने की तैयारी है।
स्थानीय मीडिया के एक बड़े वर्ग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ काम नहीं किया गया, तो इस बार सूरजकुंड मेले की हर कमी, हर अव्यवस्था और हर अनियमितता को जनता के सामने लाया जाएगा। पत्रकारों का कहना है कि अब मामला केवल प्रेस कार्ड का नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का बन चुका है।
प्रेस कार्ड विवाद ने खोला पिटारा
प्रेस कार्ड वितरण में कथित पक्षपात, योग्य पत्रकारों की अनदेखी और उसके बाद प्रसार संख्या का वार्षिक विवरण जमा कराने जैसी नई शर्त जोड़ने से यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सूरजकुंड मेले की मीडिया नीति किसके इशारे पर चल रही है। जब यह शर्त किसी लिखित नीति का हिस्सा नहीं है, तो फिर इसे लागू करने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि स्थानीय और सक्रिय मीडिया को हाशिये पर धकेलने का यह प्रयास सुनियोजित है, ताकि मेले से जुड़ी अव्यवस्थाएं, अव्यावहारिक व्यवस्थाएं और ज़मीनी सच्चाई सामने न आ सके।
अब हर व्यवस्था पर रहेगी मीडिया की नजर
पत्रकारों का कहना है कि अब मेले में
पार्किंग व्यवस्था
यातायात नियंत्रण
सुरक्षा इंतज़ाम
आगंतुक सुविधाएं
कलाकारों और शिल्पकारों की स्थिति
स्टॉल आवंटन की प्रक्रिया
स्वच्छता और मूलभूत सुविधाएं
हर एक पहलू की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच की जाएगी। जो कमियां पहले दबा दी जाती थीं, वे अब तस्वीरों, तथ्यों और प्रत्यक्ष प्रमाणों के साथ जनता के सामने लाई जाएंगी।
‘चमक दिखाइए, सच्चाई छुपाइए’ की नीति नहीं चलेगी
वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि वर्षों से सूरजकुंड मेले को केवल प्रचार की दृष्टि से दिखाया जाता रहा है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कई समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। इस बार मीडिया ने तय किया है कि केवल रंग-बिरंगी तस्वीरें और मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम दर्शक और शिल्पकार की परेशानी भी खबर बनेगी।
न्यायालय में मामला, प्रशासन पर दबाव बढ़ा
प्रेस कार्ड विवाद को लेकर जनसंपर्क अधिकारी के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की जा चुकी है, जिस पर आज सुनवाई संभव है। याचिका में यह मांग की गई है कि मीडिया के साथ भेदभावपूर्ण रवैया रोका जाए और पारदर्शी नीति लागू की जाए। यदि न्यायालय ने प्रारंभिक हस्तक्षेप किया, तो इसका असर पूरे मेले की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
संदेश साफ: दबाव नहीं, जवाबदेही चलेगी
पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि प्रशासन यह सोच रहा है कि शर्तें लगाकर या प्रेस कार्ड रोककर सवालों से बचा जा सकता है, तो यह गलतफहमी है।
अब सूरजकुंड मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि सूरजकुंड मेला व्यवस्था की मिसाल बनता है या फिर उसकी खामियां ही उसकी पहचान बन जाती हैं











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