फरीदाबाद (तरुण अरोड़ा@धर्मराज)जिले में जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी द्वारा सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले के लिए प्रेस कार्ड अथवा प्रेस पास जारी करने की प्रक्रिया में समाचार पत्रों से प्रसार संख्या का वार्षिक विवरण जमा कराने की शर्त लगाए जाने से पत्रकारों और प्रकाशकों में भारी असंतोष व्याप्त है।अब यह मामला न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मुद्दे को लेकर जनसंपर्क अधिकारी के खिलाफ कल न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिस पर आज न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता का पक्ष सुने जाने की संभावना जताई जा रही है।
पत्रकारों और प्रकाशकों का कहना है कि जनसंपर्क अधिकारी द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि यदि समाचार पत्र का वार्षिक विवरण जमा नहीं किया गया, तो सूरजकुंड मेले के लिए प्रेस कार्ड या पास जारी नहीं किया जाएगा। जबकि प्रसार संख्या का वार्षिक विवरण जमा कराने का वैधानिक अधिकार केवल भारत के प्रेस पंजीयक महानिदेशक को प्राप्त है, न कि जिला स्तर के किसी अधिकारी को।
मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा सरकार की मुद्रित मीडिया विज्ञापन नीति–2007, जो वर्तमान में भी लागू है, में यह प्रावधान केवल उन्हीं समाचार पत्रों पर लागू होता है जो सरकारी विज्ञापन पैनल में शामिल हैं। नीति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि वार्षिक विवरण की प्रति केवल विज्ञापन पात्रता अथवा पैनल में बने रहने की प्रक्रिया के तहत ही मांगी जा सकती है।
नीति में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि किसी सांस्कृतिक, पर्यटन या सार्वजनिक आयोजन—जैसे सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला—के लिए प्रेस कार्ड जारी करने की शर्त को वार्षिक विवरण से जोड़ा जा सकता है। ऐसे में गैर-पैनल समाचार पत्रों से यह दस्तावेज मांगना अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई और प्रशासनिक अतिक्रमण माना जा रहा है।
याचिका कर्ताओं का कहना है याचिका दायर करने से पहले हमने लीगल नोटिस द्वारा जानकारी दी थी परंतु उस नोटिक को जिला जन संपर्क अधिकारी द्वारा अनदेखा कर दिया गया जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तब हमने माननीय न्यायालय में याचिका दायर की है और न्यायालय की शरण ली है
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनसंपर्क अधिकारी द्वारा अपनाई गई यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रेस कार्ड किसी आयोजन की स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए दिया जाता है, न कि पत्रकारों या प्रकाशकों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से।
याचिकाकर्ता ने बताया,
“हमारा समाचार पत्र न तो सरकारी विज्ञापन लेता है और न ही किसी पैनल में है। इसके बावजूद वार्षिक विवरण नियमानुसार जमा करते है लेकिन विवरण जिला जनसंपर्क अधिकारी को जमा न करने पर सूरजकुंड मेले की कवरेज से वंचित किया जा रहा है। यह न केवल अनुचित है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है।”
वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया संगठनों का कहना है कि यदि इस प्रकार की शर्तों को स्वीकार कर लिया गया, तो भविष्य में किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी आयोजन में मनमाने नियम बनाकर पत्रकारों को कवरेज से रोका जा सकता है, जो एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत होगी।
इस मामले को लेकर हरियाणा के विभिन्न पत्रकार संगठनों द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मुख्यालय और प्रेस परिषद से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। साथ ही न्यायालय में मेला अथार्टी व राज्य सरकार तथा जिला उपयुक्त को भी प्रतिवादी बनाने पर याचिकाकर्ता विचार कर रहे है ताकि इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हो, व भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। देखने की बात यह होगी कि एक प्रेस कार्ड विवाद में जिला जनसंपर्क अधिकारी के कारण अब मेला अथार्टी ओर जिला उपायुक्त तथा अन्य अधिकारियों को भी न्यायालय में उपस्थित होना होगा या नहीं
इस संबंध में फरीदाबाद जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस प्रकार के निर्णय सामान्यतः विभागीय मुख्यालय स्तर पर लिए जाते हैं, न कि जिला कार्यालय द्वारा।
क्या होगा न्यायलय की सुनवाई में जाने अगले अंक में…..











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