चेन्नई, तमिलनाडु: मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन ने तमिलनाडु के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों को निर्देशित किया है कि वे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मच्छर जनित रोगों के हॉटस्पॉट का पता लगाने हेतु व्यापक सर्वेक्षण करें। यह कदम मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया गया है।
न्यायालय ने यह आदेश इस संदर्भ में दिया है कि हाल ही में तमिलनाडु में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिससे नागरिकों की स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। सर्वेक्षण से स्थानीय प्रशासन को जोखिम वाले क्षेत्रों का सटीक पता चल सकेगा और उन्हें प्रभावी उपचार तथा रोकथाम के लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि प्रत्येक नगरपालिका, नगर निगम और पंचायत को अपने-अपने क्षेत्रों में जल संचयन स्थल, गंदगी के ठिकाने और अन्य ऐसे स्थानों की पहचान करनी होगी जहाँ मच्छरों के प्रजनन की संभावना अधिक हो। इसके बाद स्थानीय प्रशासन को तत्काल कार्यवाही करते हुए मच्छर नियंत्रण के उपाय लागू करने होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में मच्छरों का प्रजनन वर्ष भर होता रहता है, लेकिन मानसून और बारिश के मौसम में उनकी संख्या में वृद्धि होती है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है। इसलिए सरकार और स्थानीय निकायों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे सतत निगरानी और रोकथाम के कार्यक्रम चलाएं।
सरकारी अधिकारियों ने इस आदेश का स्वागत किया है और कहा है कि वे निर्देशों का कड़ाई से पालन करेंगे। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वे अपने आस-पास साफ-सफाई बनाए रखें, जल संचयन स्थल न छोड़ें तथा मच्छरदानी और अन्य बचाव के उपाय अपनाएं।
यह सर्वेक्षण तमिलनाडु में मच्छरजनित रोगों को कम करने के लिए एक अहम पहल मानी जा रही है, जिससे राज्य में जनसामान्य की स्वास्थ्य सुरक्षा बेहतर हो सकेगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा।











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