नई दिल्ली, भारत – आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता तनाव न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है, बल्कि हमारे शरीर के कंकाल पर भी गंभीर असर डालता है। क्रॉनिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है, जिससे हड्डियों का क्षरण तेज होता है और कैल्शियम का अवशोषण भी कम हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में लगातार बढ़ा हुआ कोर्टिसोल हड्डियों की मजबूती कम कर देता है। यह हार्मोन हड्डियों में बनने वाली नई कोशिकाओं की वृद्धि को प्रभावित करता है और इस कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। कैल्शियम, जो हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक है, उस का अवशोषण भी कोर्टिसोल के प्रभाव से सीमित हो जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों की बीमारियाँ हो सकती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां पतली और कमजोर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि तनाव को समय पर नियंत्रित किया जाए।
तनाव कम करने के लिए विशेषज्ञ योग, ध्यान और नियमित व्यायाम की सलाह देते हैं। इसके अलावा संतुलित आहार जिसमें कैल्शियम और विटामिन D की पर्याप्त मात्रा हो, लेना भी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, समय-समय पर हड्डियों की जांच कराते रहना भी फायदेमंद होता है।
मानव शरीर के लिए तनाव का लगातार बढ़ना सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य, विशेष रूप से कंकाल प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बन गया है। इसलिए तनाव प्रबंधन पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखा जा सके।











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