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टेली-MANAS हेल्पलाइन पर कॉलर्स की संख्या में वृद्धि, जब AI मानसिक स्वास्थ्य में असफल रही

टेली-MANAS हेल्पलाइन पर कॉलर्स की संख्या में वृद्धि, जब AI मानसिक स्वास्थ्य में असफल रही

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D/DNA News Desk 27 अप्रैल 2026, 01:25 IST
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टेली-MANAS हेल्पलाइन पर कॉलर्स की संख्या में वृद्धि, जब AI मानसिक स्वास्थ्य में असफल रही

नई दिल्ली, भारत – टेली-MANAS हेल्पलाइन ने हाल ही में यह रिपोर्ट दी है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए अधिक से अधिक लोग मानव सलाहकारों की ओर रुख कर रहे हैं, खासकर तब जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सेवाएं उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाई हैं। यह बदलाव मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

टेली-MANAS, जिसे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित किया जाता है, मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक प्रमुख टोल-फ्री हेल्पलाइन के रूप में उभरा है। अभी तक यह हेल्पलाइन AI आधारित चैटबॉट के माध्यम से भी सेवाएं प्रदान करती रही, लेकिन हाल के सर्वेक्षण और कॉल डेटा के अनुसार, उपयोगकर्ताओं में मानव विशेषज्ञों से सीधे बात करने की मांग बढ़ी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहायता प्रदान करने का एक नया आयाम खोला है, परंतु इसमें अभी भी मनोवैज्ञानिक संवेदनशीलता, सहानुभूति और आवश्यक मानवीय समझ की कमी है। इसलिए, जब कोई व्यक्ति अपनी मानसिक पीड़ा साझा करना चाहता है, तो वे अधिक भरोसेमंद और सहायक अनुभव के लिए सीधे मानव सलाहकार को प्राथमिकता देते हैं।

टेली-MANAS के अधिकारियों ने बताया कि पिछले छह महीनों में कॉल वॉल्यूम में न्यूनतम 30% की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें अधिकांश कॉलर ने स्पष्ट रूप से संवाद के दौरान मानव संपर्क की आवश्यकता जताई। इनके अनुसार यह मामला मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी प्रतीक है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रचना शर्मा ने कहा, “AI तकनीक मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए एक सहायक उपकरण हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से मनुष्य की भूमिका की जगह नहीं ले सकती क्योंकि इसमें भावनात्मक गहराई और व्यक्तिगत पहलू की कमी होती है।”

सरकारी एजेंसियां और हेल्थकेयर प्रदाता अब यह समझ रहे हैं कि मनोवैज्ञानिक सेवाओं के क्षेत्र में तकनीकी समाधानों के साथ-साथ मानवीय संपर्क को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है। भविष्य में टेली-MANAS जैसे प्लेटफॉर्म दोनों के मिलेजुले मॉडल पर काम कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, हेल्पलाइन पर कार्यरत कर्मचारियों का प्रशिक्षण और सहयोग भी बेहतर बनाया जा रहा है ताकि वे कॉल करने वालों की आवश्यकताओं को समझ सकें और सही दिशा प्रदान कर सकें। इससे सेवा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में और वृद्धि होगी।

इस प्रकार, टेली-MANAS हेल्पलाइन का अनुभव दिखाता है कि चाहे तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, मानसिक स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील समस्या में मानवीय संपर्क का महत्व कभी कम नहीं होता। समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती समझ और सहायक साधनों की उपलब्धता, दोनों मिलकर इसे अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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