नई दिल्ली, भारत – क्विंस के 52 वर्षीय निवासी लोबगा रंगजेन ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर चीन के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आत्मदाह कर लिया। उनका यह कदम तिब्बती लोगों के खिलाफ बीजिंग की नीतियों के विरोध में था। रंगजेन ने अपनी अंतिम क्रिया में कहा कि बीजिंग की नीतियाँ तिब्बती जनता को पूरी तरह से नष्ट कर रही हैं।
आत्मदाह की घटना ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, जहां तिब्बती स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ें उठती रही हैं। स्थानीय पुलिस और आपातकालीन सेवाएं तत्काल मौके पर पहुंचीं, लेकिन रंगजेन की मृत्यु हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना तिब्बत में चीन द्वारा लागू की जा रही सख्त नीतियों के खिलाफ सबसे निराशाजनक प्रतिक्रियाओं में से एक है। बीजिंग ने लंबे समय से तिब्बती संस्कृति और पहचान को कमzor करने हेतु कई कदम उठाए हैं, जिसमें धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध और नागरिकों की निगरानी शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि वह स्थिति की गंभीरता को समझता है और सभी पक्षों से शांति और संवाद के जरिये समाधान निकालने का आग्रह करता है।
तिब्बती समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ता इस घटना को बीजिंग सरकार की कठोर नीतियों के विरुद्ध एक ज्वलंत संकेत के रूप में देख रहे हैं। रंगजेन के अंतिम शब्दों ने इस संघर्ष की जटिलता को स्पष्ट कर दिया है, जहां हजारों तिब्बती अपनी सांस्कृतिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आत्मदाह की यह घटना दुनिया भर में तिब्बती मुद्दे पर बहस को फिर से जागृत कर सकती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बेहतर कार्रवाई की मांग कर सकती है।











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