वॉशिंगटन, अमेरिका – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ बातचीत न फिराने की स्थिति में देश के महत्वपूर्ण पुलों और पावर प्लांटों को निशाना बनाने की कड़ी चेतावनी दी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच लगातार चौथे दिन भी गोलीबारी जारी थी और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकाबंदी शुरू कर दी है।
ट्रम्प के इस ताजा बयान ने क्षेत्रीय तनावों को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियां अमेरिका के लिए गंभीर खतरा हैं, और इसीलिए वे कड़े कदम उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान वार्ता में वापस नहीं आता, तो अमेरिका मजबूर होकर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी प्रकार की सैन्य धमकी को सहन नहीं करेगा और अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। दोनों देशों के बीच यह गतिरोध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह तनाव मध्य पूर्व में अस्थिरता को और बढ़ाएगा। इसके साथ ही वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक बाजारों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी बढ़ाकर ईरान की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने की रणनीति अपनाई है, वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के रूप में खाड़ी क्षेत्र में अपने सैन्य कब्जे मजबूत कर लिए हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे अभी भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद रखते हैं, परंतु अगर ईरान ने वार्ता शुरू करने में देरी की तो देश की सुरक्षा के लिए अमेरिका को कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय और वैश्विक समुदाय की नजरें अमेरिकी और ईरानी सरकारों के अगले चालों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि कोई भी बड़ा सैन्य संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।











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