संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने आतंकवाद और अफगानिस्तान में हिंसा को लेकर पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड नरसंहार, आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों से भरा पड़ा है।
सुरक्षा परिषद में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारतीय दूत ने कहा कि दुनिया में जारी संघर्षों के बीच आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पतालों, स्कूलों और धार्मिक स्थलों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन है।
भारत ने युद्ध में इस्तेमाल हो रही नई तकनीकों को लेकर भी चिंता जताई। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि ड्रोन और स्वायत्त हथियारों का तेजी से बढ़ता उपयोग आने वाले समय में नागरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रखा जाना जरूरी है।
पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाने पर भारतीय प्रतिनिधि ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने इतिहास और वर्तमान को देखना चाहिए। भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई का जिक्र करते हुए UNAMA रिपोर्ट का हवाला दिया।
भारत ने दावा किया कि अफगानिस्तान में हुई अधिकांश नागरिक मौतों और चोटों के पीछे पाकिस्तानी सेना की सीमा पार कार्रवाई जिम्मेदार रही है। भारतीय दूत ने काबुल के अस्पताल पर हुए कथित हमले को “कायरतापूर्ण” बताते हुए कहा कि अस्पतालों को किसी भी स्थिति में सैन्य निशाना नहीं बनाया जा सकता।
भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को उसके अतीत की याद दिलाई। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि उस दौर में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए अत्याचार इतिहास के सबसे काले अध्यायों में शामिल हैं।
अपने संबोधन के अंत में भारत ने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है।











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