लंदन, इंग्लैंड – चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम को युवा लोगों के लिए गंभीर खतरे के रूप में बताया है। द एकेडमी ऑफ मेडिकल रॉयल कॉलेजेस ने यह सुझाव दिया है कि डॉक्टरों को अपने युवा मरीजों से नियमित रूप से उनके स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया के उपयोग के बारे में जांच करनी चाहिए।
डॉक्टरों का मानना है कि आज के समय में युवा पीढ़ी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स उनकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से तनाव, चिंता, अवसाद जैसे मानसिक रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही लगातार स्क्रीन के सामने रहने से नींद में कमी और दृष्टि संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
एकेडमी ने स्पष्ट किया है कि बच्चे और युवाओं के डिजिटल व्यवहार पर निगरानी रखना केवल माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि चिकित्सा पेशेवरों को भी इस पर ध्यान देना आवश्यक है। डॉक्टरों द्वारा स्क्रीन टाइम के आकलन से समय रहते स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर उचित सलाह और उपचार दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा संस्थानों को भी मिलकर काम करना होगा ताकि युवाओं के लिए हेल्दी डिजिटल आदतों को बढ़ावा दिया जा सके। सोशल मीडिया के सकारात्मक लाभों के साथ-साथ इसके दुष्प्रभावों से भी लोगों को अवगत कराया जाना चाहिए।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के वर्षों में युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायतों में वृद्धि हुई है, और सोशल मीडिया को एक प्रमुख कारक माना जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि समाज में डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को नियंत्रित कर सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण बनाया जाए।
अंततः, विशेषज्ञों ने सभी स्टेकहोल्डर्स से अपील की है कि वे युवाओं के डिजिटल स्वास्थ्य पर ध्यान दें और बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करें ताकि आने वाली पीढ़ी मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में सशक्त बने।











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