नई दिल्ली, भारत – 2024 लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के विश्लेषण से पता चला है कि कुल 8,360 उम्मीदवारों में केवल 800 (9.6%) महिलाएं शामिल थीं। यह आंकड़ा महिला भागीदारी की कमी को स्पष्ट करता है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लैंगिक असंतुलन को दर्शाता है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के विश्लेषण के अनुसार, 543 संसदीय सीटों में से 152 निर्वाचन क्षेत्रों (28%) में कोई महिला उम्मीदवार नहीं थी। यह दर्शाता है कि अधिकांश क्षेत्र अभी भी महिला प्रतिनिधित्व के लिए अवसरों से वंचित हैं।
विशेषज्ञ इस नतीजे को चिंताजनक मानते हैं क्योंकि महिलाओं की प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में यह प्रयास अभी भी अधूरा है। राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है, जिससे महिला उम्मीदवारों की कुल संख्या सीमित रही।
महिला उम्मीदवारों की इस कमी के पीछे कई कारण माने जाते हैं, जिनमें सामाजिक-आर्थिक बाधाएं, परंपरागत सोच और राजनीतिक समर्थन की कमी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के लिए समान अवसरों और संसाधनों की उपलब्धता भी कम है, जो उनकी चुनावी सफलता को प्रभावित करती है।
एडीआर की इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि महिला सशक्तिकरण और बराबरी के लिए चुनावी राजनीति में उन्हें अधिक शामिल करने की आवश्यकता है। सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे जो महिला उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करें और उनके लिए वातावरण को सकारात्मक बनाएं।
लोकसभा चुनावों में महिलाओं की प्रतिनिधित्व बढ़ाने से न केवल राजनीति में विविधता आएगी बल्कि नीतिगत निर्णयों में महिलाओं की आवश्यकताओं और हितों का भी बेहतर ध्यान रखा जा सकेगा। यह पूरी व्यवस्था को और अधिक लोकतांत्रिक और समावेशी बनाता है।
इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों को महिला उम्मीदवारों के समर्थन के लिए नीतिगत बदलाव करने होंगे और साथ ही समाज को भी महिलाओं की भागीदारी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा। तभी जाकर चुनावी राजनीति में महिला सशक्तिकरण का वास्तविक स्वरूप सामने आ सकेगा।











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