Bangalore, Karnataka
राज्य भाजपा अध्यक्ष ने अपने पिता के आपातकाल के दौरान 19 महीने भूमिगत रहने की याद को ताजा किया। यह भावुक बयान उन्होंने अपने पिता के 92वें जन्मदिवस पर आयोजित चौथे स्मृति व्याख्यान में दिया। पी.वी.एन. माधव ने उस कठिन दौर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उनके पिता ने देश की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह किए बिना भूमिगत रहने का निर्णय लिया।
आपातकाल के दौरान देश में अनेक राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों को निशाना बनाया गया। इस कठिन परिस्थिति में पी.वी.एन. माधव के पिता ने अपने परिवार की चिंता के बावजूद जनता की भलाई और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने 19 महीनों तक छिप कर रहना महत्वपूर्ण समझा, जिससे सरकार के दमनकारी रवैये से बचा जा सके और गुप्त रूप से आंदोलनों को समर्थन दिया जा सके।
इस अवसर पर भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे। उन्होंने पी.वी.एन. माधव के पिता की वीरता और साहस की भूरि-भूरि प्रशंसा की। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी को ऐसे संघर्षों को अवश्य जानना चाहिए, जिससे वे राष्ट्र के लिए अधिक जागरूक और समर्पित बन सकें।
स्मृति व्याख्यान में उपस्थित लोगों ने आपातकाल के दौरान हुए अन्यायों की भी चर्चा की और लोकतंत्र की महत्वता पर जोर दिया। पी.वी.एन. माधव ने अंत में कहा कि हमें अपने इतिहास को याद रखना चाहिए और देश में लोकतंत्र और स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
यह आयोजन न केवल एक स्मृति स्थल था, बल्कि एक प्रेरणा भी था, जो समाज के लिए यह संदेश देता है कि स्वतंत्रता कभी भी सस्ती नहीं होती और इसके लिए कई जानें एवं प्रयासों की आवश्यकता होती है।











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