नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं को लेकर हो रही है जिन्हें इस बार पार्टी ने दोबारा मौका नहीं दिया। खासकर केंद्रीय मंत्री Ravneet Singh Bittu और George Kurian का नाम सूची में शामिल न होने से कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जाने लगे हैं।
दोनों नेता वर्तमान में केंद्र सरकार का हिस्सा हैं और राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में पहुंचे थे। ऐसे में उनका नाम सूची से बाहर रहने के बाद मोदी सरकार में संभावित फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की तैयारी में भाजपा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के जरिए कई बार भविष्य की राजनीतिक रणनीति के संकेत देती रही है। इस बार भी दो केंद्रीय मंत्रियों को टिकट न मिलना केवल संयोग नहीं माना जा रहा।
हाल के दिनों में केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच नई जिम्मेदारियों का बंटवारा कर सकती है। हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
संगठन के नेताओं को मिली प्राथमिकता
इस बार भाजपा ने कई नए चेहरों को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Tarun Chugh और राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Satish Poonia को पहली बार उच्च सदन में भेजने की तैयारी की गई है।
इसके अलावा गुजरात में पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधते हुए ओबीसी और आदिवासी समुदाय से जुड़े नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में भी लंबे समय से संगठन में सक्रिय नेताओं पर भरोसा जताया गया है।
रवनीत बिट्टू और कुरियन के लिए क्या हो सकती है अगली भूमिका?
पंजाब के प्रभावशाली नेता रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बावजूद राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा उन्हें पंजाब की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी उन्हें संगठन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका सौंप सकती है।
वहीं, केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन को लेकर भी माना जा रहा है कि भाजपा दक्षिण भारत में अपने विस्तार अभियान के तहत उन्हें नई राजनीतिक जिम्मेदारी दे सकती है। पार्टी ईसाई समुदाय तक अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए उनके अनुभव का उपयोग कर सकती है।
राज्यसभा की अधिकांश सीटों पर भाजपा मजबूत स्थिति में
भाजपा ने जिन राज्यों से उम्मीदवार घोषित किए हैं, वहां पार्टी का विधानसभा में मजबूत संख्या बल है। गुजरात की चार, राजस्थान और मध्य प्रदेश की दो-दो, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की एक-एक सीट पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसके अलावा ओडिशा की उपचुनाव वाली सीट पर भी पार्टी को बढ़त हासिल है।
भविष्य की राजनीति का संकेत मानी जा रही सूची
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा की यह सूची सिर्फ राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक रणनीति का भी संकेत देती है। पार्टी संगठन को मजबूत करने, नए नेतृत्व को आगे लाने और विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा टिकट से वंचित रहे केंद्रीय मंत्रियों की आगे क्या भूमिका होगी और क्या आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।











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