चंडीगढ़, पंजाब। हाल ही में विवादों में घिरी फिल्म ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब 95’ नाम से जाना जाता था, अब OTT प्लेटफॉर्म से हटा दी गई है। इसके बावजूद पंजाब और जम्मू में कथित तौर पर इस फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग की जा रही है, जिसके खिलाफ एक याचिका अदालत में दायर की गई है।
अधिवक्ता द्वारा दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि बिना अनुमति के इस फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाले आयोजक कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि ‘सतलुज’ फिल्म की ये अवैध प्रदर्शनियां समुदायों के बीच नफरत और हिंसा को बढ़ावा देती हैं। इसके चलते सुरक्षा हालात खराब होने का खतरा उत्पन्न होता है, जो कि सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक है।
अधिकारियों से मांग की गई है कि वे इन अवैध स्क्रीनिंग की तुरंत जांच करें और आयोजकों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करें। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर इन्हें रोका नहीं गया तो क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की पूरी संभावना है।
फिल्म ‘सतलुज’ की शुरुआत से ही विवादों से घिरी रही है। OTT से हटाए जाने के बाद भी इसकी सार्वजनिक प्रदर्शनियों को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी अवैध स्क्रीनिंग न केवल फिल्म उद्योग के लिए गलत सन्देश देती हैं, बल्कि इससे समाज में अस्थिरता भी फैलती है।
पंजाब और जम्मू में प्रशासन ने भी इस मामले में सतर्कता बरतने की बात कही है और कहा है कि नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, अदालत में याचिका की सुनवाई जारी है और अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
फिल्म की लोकप्रियता के कारण इसे लेकर जनता की दिलचस्पी बनी हुई है, लेकिन सुरक्षित और कानूनी तरीके से ही कोई भी फिल्म दर्शकों तक पहुंचनी चाहिए। अवैध स्क्रीनिंग रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना प्राथमिकता बन गई है ताकि सामाजिक शांति बनी रहे।











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