मुंबई, महाराष्ट्र – हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के करियर में एक ऐसा दौर भी आया जब वे गहरे मानसिक संकट से गुज़र रहे थे। यह समय था 1980 के दशक का, जब उनका फिल्म ‘कर्ज़’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई थी, वहीं विपरीत दिशा में उनकी फिल्म ‘क़ुर्बानी’ ने बहुत बड़ी सफलता हासिल कर ली थी।
ऋषि कपूर की फिल्मों ‘‘कर्ज़’’ और ‘‘क़ुर्बानी’’ एक ही दशक में रिलीज हुई थीं, लेकिन दोनों की बॉक्स ऑफिस पर टक्कर ने कपूर की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला। ‘‘कर्ज़’’ की असफलता से वे बहुत निराश हुए, और इस असफलता ने उन्हें डिप्रेशन की गहरी स्थिति में पहुंचा दिया। शूटिंग के दौरान उनका स्वास्थ्य और मनोबल दोनों ही प्रभावित हुए, जिससे उनके काम करने की क्षमता कमज़ोर पड़ गई।
निर्देशक सुभाष घई भी ‘कर्ज़’ की असफलता से दुखी थे, क्योंकि उन्होंने इस फिल्म पर खूब मेहनत की थी और वे ऋषि कपूर के प्रदर्शन से प्रभावित थे। लेकिन बॉक्स ऑफिस पर मिली निराशाजनक प्रतिक्रिया ने दोनों के आत्मविश्वास को काफी क्षति पहुंचाई।कपिल ने बाद में भी मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उस समय वे काफी टूट चुके थे, और फिल्म इंडस्ट्री का दबाव उनके लिए भारी होता जा रहा था।
फिर भी, ऋषि कपूर ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने मानसिक स्वास्थ्य पर काम किया और धीरे-धीरे अपने आत्मविश्वास को वापस पाया। समय के साथ, ‘‘कर्ज़’’ ने कितना ही बॉक्स ऑफिस पर असफल रहा हो, एक क्र cult फिल्म का दर्जा हासिल कर लिया, और फिल्म की प्रसिद्ध गाने आज भी लोकप्रिय हैं।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी भी कलाकार के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, और सफलता या असफलता केवल अस्थायी होती है। ऋषि कपूर का संघर्ष और पुनरुद्धार हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक प्रेरणादायकक्रम की तरह दर्ज है।
इस तरह, ‘क़ुर्बानी’ की चमक के बीच भी ऋषि कपूर ने ‘‘कर्ज़’’ को एक खास पहचान दिलाई, जो उनकी प्रतिभा और धैर्य का प्रमाण है।











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