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‘जेल जैसा महसूस हुआ’: क्यों इस IIT स्नातक ने इंजीनियरिंग से दूर भागना चुना

‘जेल जैसा महसूस हुआ’: क्यों इस IIT स्नातक ने इंजीनियरिंग से दूर भागना चुना

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D/DNA News Desk 20 जुलाई 2026, 12:10 IST
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‘जेल जैसा महसूस हुआ’: क्यों इस IIT स्नातक ने इंजीनियरिंग से दूर भागना चुना

वाराणसी, उत्तर प्रदेश – एक IIT (BHU) के स्नातक ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपनी कहानी साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें अपनी इंजीनियरिंग डिग्री के कारण “जेल जैसा महसूस” हुआ। यह खुलासा सोशल मीडिया पर एक व्यापक चर्चा का कारण बना, जहां लोगों ने करियर विकल्प, जुनून और शिक्षा के महत्व पर गहरी बहस की।

इस युवा ने, जो कि मेटलर्ज़ी शाखा से अध्ययनरत था, कहा कि उन्होंने इंजीनियरिंग में अपने समय के दौरान खुद को कहीं फंसा हुआ महसूस किया। “मुझे लगा कि मैं एक कैद में हूं, जहां मेरे पास अपनी पसंद चुनने की स्वतंत्रता नहीं थी,” उन्होंने कहा। इसके बाद, उन्होंने अपने क्षेत्र को पूरी तरह से छोड़ दिया और एक पूरी तरह से अलग पेशे में अपने कैरियर की शुरुआत की।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल एक कॉलेज डिग्री से किसी व्यक्ति की जिंदगी और करियर को निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि करियर में सफलता और संतुष्टि के लिए आवश्‍यक है कि व्यक्ति अपने जुनून और रुचि के क्षेत्र का पालन करे।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मामला उन छात्रों के लिए एक झलक है जो दबाव या सामाजिक अपेक्षाओं के चलते अपनी पसंद के खिलाफ पढ़ाई करते हैं। करियर निर्देशकों का मानना है कि युवाओं को सिर्फ डिग्री लेने की बजाय अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार करियर चुनना चाहिए।

सोशल मीडिया पर इस विषय पर बहस को देखते हुए, कई लोग अपनी इसी तरह की कहानियां साझा कर रहे हैं जहां उन्होंने पारंपरिक करियर मार्गों को छोड़ कर अपनी रुचि के अनुसार काम करना चुना। इस प्रकार की चर्चाएं शिक्षा प्रणाली की मजबूरियों और व्यक्तियों की पसंद के बीच के टकराव को भी उजागर कर रही हैं।

यह मामला यह याद दिलाता है कि करियर सिर्फ डिग्री और प्रतिष्ठित संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह किसी व्यक्ति की रुचि, क्षमताओं और जुनून का प्रतिबिंब होना चाहिए। छात्रों और अभिभावकों के बीच इस पर खुली बातचीत और समझ विकसित करने की आवश्यकता है ताकि युवा सही दिशा में अपने सपनों का पीछा कर सकें।

स्थानीय शिक्षा इकाईयों और करियर काउंसलरों को भी इस बहस से लाभ उठाकर छात्रों को सही मार्गदर्शन देने का प्रयास करना चाहिए, ताकि वे अपने व्यक्तित्व और आकांक्षाओं के अनुसार निर्णय ले सकें।

यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जहां परंपरागत सोच और सामाजिक दबाव करियर विकल्पों को सीमित कर सकते हैं, वहीं व्यक्ति की असली सफलता उसके जुनून और आत्मविश्वास में ही छिपी होती है।

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