नई दिल्ली, भारत: यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर किया है, जिसमें 1992 के रेजिडेंसी स्कीम को लागू करने की मांग की गई है। इस याचिका में रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी घंटों को नियंत्रित करने, सप्ताह में एक दिन अवकाश देने, पर्याप्त आराम और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
याचिका 23 जुलाई 2026 को माननीय कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी, जिसके माध्यम से एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड डॉ. चारू माथुर आवेदन की ओर से बहस करेंगे। UDF का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार है, जो न केवल उनकी सेहत पर प्रभाव डालता है, बल्कि मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
डॉक्टरों के प्रशिक्षण की जिम्मेदारियां और उनकी भलाई के बीच गहरा संबंध है। याचिका में यह भी बताया गया है कि बिना पर्याप्त आराम और सप्ताहिक अवकाश के, डॉक्टरों की थकान बढ़ती है, जिससे मेडिकल त्रुटियों की संभावना भी बढ़ जाती है।
UDF की इस पहल का उद्देश्य है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से देखते हुए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं। विशेषज्ञों के अनुसार, रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता के लिए अनिवार्य हैं।
भारत में अस्पतालों के अतिभारित होने के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों की जिम्मेदारियां अत्यधिक बढ़ गई हैं। लगातार लंबे घंटे काम करने की वजह से कई बार उनकी सेहत भी प्रभावित होती है। न्यायालय से अपेक्षा जताई जा रही है कि वे डॉक्टरों के अधिकारों और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में न्यायसंगत निर्णय करेंगे।
यह मामला न केवल डॉक्टरों के कल्याण से जुड़ा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने से भी संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत, लागू की जाने वाली स्कीम से अस्पतालों में कार्यप्रणाली में सुधार होगा और चिकित्सकीय सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
UDF की इस याचिका से देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों को एक सशक्त मंच मिलेगा, जिससे उनकी कार्य स्थितियों में सकारात्मक बदलाव संभव होगा। डॉक्टरों की समस्याओं को उजागर करते हुए यह याचिका स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार हेतु एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।











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