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कांग्रेस और डीएमके अभी भी संसद में साथ काम कर सकते हैं, कहते हैं कर्ती पी. चिदंबरम

कांग्रेस और डीएमके अभी भी संसद में साथ काम कर सकते हैं, कहते हैं कर्ती पी. चिदंबरम

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D/DNA News Desk 8 जून 2026, 09:37 IST
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कांग्रेस और डीएमके अभी भी संसद में साथ काम कर सकते हैं, कहते हैं कर्ती पी. चिदंबरम

नई दिल्ली, दिल्ली – लोकसभा सदस्य कर्ती पी. चिदंबरम ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है जिसमें उन्होंने बताया कि कांग्रेस अब भी संसद में द्रमुक (डीएमके) के साथ मिलकर काम कर सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस विभिन्न राज्यों में अलग-अलग पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने के बावजूद संसद में सहयोग जारी रखती है।

उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि कांग्रेस वर्तमान में बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में कुछ पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ रही है, लेकिन संसद में वह सीपीआई(एम) और तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रही है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य स्तर के राजनीतिक मुकाबले से अलग संसद में राजनीतिक सहयोग का महत्व है।

कर्ती पी. चिदंबरम ने कहा, “राजनीति में सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों जरूरी हैं। जहां एक तरफ हम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए अन्य पार्टियों के साथ मुकाबला करते हैं, वहीं संसद में देशहित के मुद्दों पर सहमति बनाना प्राथमिकता होती है।”

राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान विपक्षी दलों के बीच एकता और गठबंधन की संभावनाओं को मजबूत करते हैं, खासकर आने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का यह बयान विपक्षी मोर्चे को सशक्त बनाने का संकेत भी माना जा रहा है।

वर्तमान समय में देश की राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं, और विपक्षी पार्टियों के बीच सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। कर्ती पी. चिदंबरम द्वारा दिया गया यह बयान विपक्ष में एक नई रणनीति का परिचायक हो सकता है, जिसमें वे राज्य स्तर की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हितों के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं।

इस संदर्भ में, राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि कांग्रेस का यह रवैया विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और गठबंधन की संभावनाओं को जन्म देगा, जो देश की समृद्ध लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

आगामी चुनावों में विपक्ष के गठबंधन की ताकत बढ़ाने के लिए ऐसे संकेत बेहद आवश्यक माने जा रहे हैं ताकि वे सरकार के खिलाफ एक मजबूत प्रतिस्पर्धा प्रस्तुत कर सकें।

सारांश में कहा जा सकता है कि कांग्रेस और डीएमके, हालांकि राज्य स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते हैं, फिर भी संसद में एक-दूसरे के सहयोगी बने रह सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिलती है।

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