बर्लिन, जर्मनी: भारत में काम करने के बाद अक्सर काम की व्यस्तता हमारी निजी जिंदगी में घुसपैठ करती है, लेकिन यूरोप में एक अलग ही सांस्कृतिक परंपरा देखने को मिलती है। भारतीय प्रवासी हिमानी शर्मा, जो वर्तमान में जर्मनी में रह रही हैं, ने बताया कि यहां के लोग काम के बाद पूरी तरह से अपने काम से अलग हो जाते हैं और अपने निजी समय का आनंद लेते हैं।
हिमानी शर्मा का कहना है कि यूरोप में काम खत्म होते ही दुकानें बंद हो जाती हैं और लोग पूरी तरह अपने परिवार और मित्रों के साथ समय बिताते हैं। यहां की इस प्रवृत्ति से उनमें यह समझ आई है कि जीवन में काम के साथ जीवन के अन्य पहलुओं को भी महत्व देना कितना जरूरी है। उन्होंने बताया, “भारत में अक्सर काम के दबाव की वजह से व्यक्ति अपने व्यक्तिगत समय को सही तरीके से नहीं जी पाता, जबकि यहाँ लोग सच में काम करना बंद कर देते हैं।”
यह बदलाव केवल शारीरिक रूप से काम से दूरी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से भी लोग काम की चिंता समाप्त कर देते हैं। इससे उनके रिश्ते मजबूत होते हैं और वे जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेने में सक्षम होते हैं। यह बात हिमानी शर्मा के लिए एक गहरा अनुभव रही है, जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में भी बदलाव लाने लगी है।
शर्मा ने आगे बताया कि यूरोप की इस आदत से कहीं न कहीं काम और जीवन के बीच सही संतुलन बनता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। वे उम्मीद जताती हैं कि भारत में भी लोग इस तरह के बदलाव की ओर बढ़ेंगे कि काम खत्म होते ही वे अपने जीवन के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को समय दें।
उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी अगली मंजिल की ओर भी यही संदेश लेकर जाएंगी कि काम के साथ जीवन के अन्य पहलुओं को महत्व देना आवश्यक है, ताकि हम न केवल बेहतर कर्मचारी बन सकें, बल्कि बेहतर इंसान भी।











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