मुंबई, महाराष्ट्र। प्रसिद्ध अभिनेता सैयाजी शिंदे, जिन्होंने ‘शूल’ और ‘सरकार राज’ जैसी फिल्मों में अपनी उत्कृष्ट अदाकारी से सभी के दिल में जगह बनाई है, ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल की है। सैयाजी शिंदे ने हाल ही में ‘सह्याद्री देवऱाई’ नामक एक अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत महाराष्ट्र में अब तक छह लाख पचास हजार से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं।
यह अभियान सैयाजी शिंदे की अपनी मां के प्रति अपार प्रेम और समर्पण से प्रेरित है। उन्होंने अपनी मां की याद में और महाराष्ट्र के सूखे प्रभावित क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की। शिंदे का मानना है कि पर्यावरण की रक्षा और वृक्षारोपण ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ जीवन सुनिश्चित कर सकता है।
‘सह्याद्री देवऱाई’ परियोजना का मकसद केवल पेड़ लगाना नहीं बल्कि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को भी इस प्रयास में जोड़ना है ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। इस पहल के तहत खासकर सूखे प्रभावित इलाकों में वृक्षारोपण पर जोर दिया गया है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ ग्राम्य पुनरुद्धार भी संभव हो सके।
सैयाजी शिंदे ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी मां ने हमेशा प्रकृति और पेड़ों का सम्मान करने की सीख दी, जो उनकी इस पहल का मूल आधार रही है। उन्होंने कहा, “जब तक हम प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठाएंगे, तब तक जीवन में स्थिरता संभव नहीं। ये पेड़ सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदान हैं।”
इस अभियान का असर महाराष्ट्र में साफ नजर आ रहा है। कई स्थानी ग्रामीण और युवा वर्ग इस पहल के साथ जुड़कर पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम बताया है।
सैयाजी शिंदे का यह प्रयास साबित करता है कि कला जगत के लोग भी सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को संजीदगी से लेकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय प्रशासन भी इस पहलकदमी में सहयोग कर रहे हैं जिससे इसके प्रभाव को बढ़ावा मिल रहा है।
समग्र रूप से कहा जा सकता है कि ‘सह्याद्री देवऱाई’ अभियान एक मिसाल है कि किस तरह समय-समय पर जिम्मेदार नागरिक और हस्तियां मिलकर समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकती हैं। यह अभियान न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा कर रहा है बल्कि सभी को एकजुट होकर प्रकृति की ओर लौटने का संदेश दे रहा है।











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