नई दिल्ली, भारत – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पायरेसी पाठ्यपुस्तकों और नकली पुस्तकों के प्रसार के खिलाफ कड़ी सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की है। खासतौर पर, सोशल मीडिया नेटवर्क, वेबसाइटों और ऑनलाइन ग्रुप्स पर नकली कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया बियॉन्ड” तेजी से शेयर की जा रही है।
NCERT ने अपने आधिकारिक बयान में सभी संबंधित पक्षों को सलाह दी है कि वे केवल NCERT की प्रमाणित वेबसाइट ईपाठशाला और अधिकृत विक्रेताओं से ही पाठ्यपुस्तकों और शैक्षिक सामग्री की प्राप्ति करें। इसमें कहा गया है कि बिना अनुमति के निर्मित या वितरित की गई पुस्तकों का उपयोग शिक्षार्थियों और शिक्षकों के लिए किसी भी प्रकार से अनुचित और हानिकारक हो सकता है।
यह कदम कापीराइट एक्ट, 1957 के तहत कानूनी कार्रवाई की तैयारी के साथ उठाया गया है। NCERT ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की नकल और पायरेसी से शैक्षिक साख पर बुरा प्रभाव पड़ता है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में बाधा आती है।
स्वयं NCERT ने पठन सामग्री के डिजिटलीकरण व आधिकारिक ऑनलाइन प्लेटफार्मों जैसे ईपाठशाला के माध्यम से पाठ्यपुस्तकों को उपलब्ध कराने में तेजी लाई है ताकि शिक्षा का दायरा अधिकतम छात्रों तक पहुँचे। इसके बावजूद, संदिग्ध और नकली संस्करणों का प्रसार शैक्षिक प्रक्रियाओं के लिए गंभीर चुनौती है, जिसके खिलाफ परिषद ने कड़े कदम उठाने का एलान किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पायरेसी न केवल शैक्षिक संस्थाओं की आर्थिक हानि का कारण बनती है, बल्कि सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित होने से छात्रों के ज्ञानार्जन में भी बाधा उत्पन्न करती है। इसलिए शैक्षणिक क्षेत्र के सभी हितधारकों, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को सतर्क रहना और समाधानात्मक प्रयास करना आवश्यक हो गया है।
NCERT का यह आग्रह है कि केवल अधिकृत स्रोतों से ही अध्ययन सामग्री प्राप्त कर शिक्षकों और विद्यार्थियों की शिक्षा यात्रा को सुरक्षित व प्रामाणिक बनाया जाए। कापीराइट उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ा दंड दिया जाएगा जिससे भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जा सके।
अधिक जानकारी और पाठ्यपुस्तकों के आधिकारिक संस्करण देखने के लिए पाठक NCERT की वेबसाइट अथवा ईपाठशाला पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक दायित्व है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य बाधित न हो और विद्यार्थी सही ज्ञान प्राप्त कर सकें।











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