लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया – ऑस्कर पुरस्कारों के नियमों में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो 2027 से लागू होंगे। हॉलीवुड की इस प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार संस्था ने अपनी प्रक्रियाओं में तकनीकी आधुनिकता और वैश्विक विविधता को समायोजित करते हुए कुछ नई नीतियां पेश की हैं।
सबसे खास बात यह है कि ऑस्कर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्णय नहीं लिया है। इसके बजाए, उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन और पटकथा लेखन में मानवीय अधिकार और सहमति अनिवार्य होगी। इसका मतलब यह है कि कोई भी कलाकार या लेखक अपने काम के लिए मानवीय स्वीकृति देंगे और स्क्रीनप्ले की रचना भी मानव द्वारा की जानी चाहिए। इस नीति का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका को स्वीकारते हुए भी फिल्म निर्माण में मानवीय रचनात्मकता और नैतिक अधिकारों की सुरक्षा करना है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय फिल्म श्रेणी में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल प्रत्येक देश द्वारा भेजी गई फिल्मों को ही नामांकन के लिए नहीं माना जाएगा, बल्कि विश्व के प्रमुख फिल्म महोत्सवों में पुरस्कार जीतने वाली फिल्मों को सीधे नामांकन के लिए पात्र बनाया जाएगा। इससे वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट फिल्मों को सम्मानित करने का अवसर बढ़ेगा। इस बदलाव से फिल्म में नेशनल प्रतिनिधित्व की जगह फिल्म निर्माताओं को अधिक महत्व मिलेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समुदाय की रचनात्मकता और स्वतंत्रता को समर्थन मिलेगा।
ऑस्कर प्रशासन के अनुसार, ये बदलाव फिल्म उद्योग की बदलती तकनीक और वैश्विक निर्माताओं की विविधता को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे भी वे फिल्म कला की परंपराओं और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नियमों में संशोधन करते रहेंगे।
फिल्म प्रेमी, कलाकार और निर्माता इस कदम को स्वागतयोग्य मान रहे हैं क्योंकि यह फिल्म निर्माण की स्वतंत्रता को संरक्षित करते हुए नए तकनीकी युग के साथ तालमेल बैठाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
आने वाले वर्षों में ऑस्कर पुरस्कार समारोह में इन नियमों के प्रभाव को देखना रोचक होगा, खासकर जब एआई और वैश्विक प्रतिनिधित्व फिल्मों की दुनिया में बड़े बदलाव ला रहा है।











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