मुंबई, महाराष्ट्र
पिछले पच्चीस वर्षों में, फिल्म ‘लगान’ ने भारतीय सिनेमा में एक अमिट छाप छोड़ी है। ब्रिटिश अभिनेता पॉल ब्लैकरथोर्न, जिन्होंने इस फिल्म में कप्तान एंड्रयू रसेल की भूमिका निभाई थी, आज भी इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि उनका किरदार दर्शकों पर कितना प्रभाव डालता है। हाल ही में मुंबई के दैरान, पॉल ने ‘लगान’ को फिर से जीवित करते हुए, फिल्म के प्रति अपनी भावनाएँ साझा कीं और बताया कि फिल्म में काम करना उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय था।
पॉल ब्लैकरथोर्न का कहना है कि ‘लगान’ के सेट पर काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था। 1893 के ब्रिटिश राज के दौरान ली गई इस फिल्म ने औपनिवेशिक भारत की सामाजिक परिस्थितियों को वास्तविकता के करीब प्रस्तुत किया है। पॉल ने बताया, “मुझे ब्रिटिश राज की आलोचना करने में खुशी हुई, क्योंकि यह वह समय था जब भारतीय जनता अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष कर रही थी। ‘लगान’ ने इतिहास के एक महत्वपूर्ण पहलू को बड़े पर्दे पर लाने का साहस किया।”
पॉल और आमिर खान की बॉन्डिंग की भी चर्चा हुई, जिन्होंने मिलकर फिल्म को विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। पॉल ने बताया कि आमिर खान ने सेट पर हर कलाकार और क्रू मेंबर के साथ परिवार जैसा व्यवहार किया, जिससे पूरी टीम का मनोबल ऊँचा रहा। उन्होंने कहा, “मैं आमिर के काम और उनकी प्रतिभा की हमेशा सराहना करता हूँ। ‘लगान’ में उनकी मेहनत और समर्पण स्पष्ट दिखता है।”
‘लगान’ के बाद भी पॉल ने भारतीय फिल्मों और संस्कृति के प्रति अपनी रुचि जारी रखी है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “भारत एक बहुआयामी देश है जहाँ विविधता और परंपराएँ दूरगामी हैं। मैं यहाँ आकर हमेशा कुछ नया सीखता हूँ।”
ब्रिटिश अभिनेता के लिए भारत में वापस आना एक भावनात्मक अनुभव भी रहा। उन्होंने बताया कि किस तरह ‘लगान’ ने उन्हें भारत के प्रति एक गहरा सम्मान और समझ विकसित करने में मदद की। पॉल इस बात से भी उत्साहित हैं कि आज भी फिल्म युवा और वृद्ध दर्शकों के बीच लोकप्रिय है और इसे कई बार टीवी, थिएटर और समारोहों में पुनः प्रस्तुत किया जाता है।
फिल्म ‘लगान’ का २५वां वर्षगांठ मनाते हुए, पॉल ब्लैकरथोर्न ने यह स्पष्ट किया कि यह फिल्म न सिर्फ एक मनोरंजन का साधन है बल्कि वह इतिहास से जुड़ी एक अनमोल दस्तावेज़ भी है। उन्होंने कहा, “ऐसे प्रोजेक्ट्स में काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही और मैं दर्शकों के प्यार और प्रतिक्रिया से हमेशा प्रेरित हूँ।”
इस प्रकार, ‘लगान’ ने समय की कसौटी पर खरा उतरते हुए भारतीय और विश्व सिनेमा में अपनी एक खास जगह बनाई है, और पॉल ब्लैकरथोर्न ने उस कहानी का हिस्सा बनकर न केवल अपने कैरियर को समृद्ध किया बल्कि इतिहास के एक अध्याय को भी जीवंत किया।











टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।