इस्तांबुल, तुर्की – समलैंगिक यात्रियों के लिए समर्पित एक भूमध्यसागरीय क्रूज जहाज को तुर्की और उसके बाद मिस्र ने अपने तटों पर प्रवेश करने से रोक दिया है। यह घटना उस समय सामने आई जब इस क्रूज ने कोरोना महामारी पूर्व यात्रा करते हुए ये दोनों देश बिना किसी परेशानी के पार कर लिए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे इन दोनों मुस्लिम बहुल देशों में समलैंगिकता के प्रति सरकारों की बढ़ती असहिष्णुता है।
इस क्रूज का उद्देश्य मुख्य रूप से LGBT समुदाय को एक सुरक्षित और आनंदमय यात्रा प्रदान करना था। पिछले वर्षों में यह क्रूज भूमध्यसागरीय क्षेत्र के कई प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंच चुका है, जिसमें तुर्की और मिस्र भी शामिल थे। लेकिन हाल के वर्षों में इन दोनों देशों में समलैंगिकों के प्रति बात-चीत में कठोरता आई है और कई बार सार्वजनिक रूप से भी उनके विरुद्ध नीतियां और कड़े कानून बनाए गए हैं।
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि यह न केवल यात्रा और पर्यटन के क्षेत्र में बाधा है, बल्कि यह LGBT समुदाय के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। संगठन यह भी कहते हैं कि ऐसे कदम समाज में नफरत और कट्टरता फैलाने वाले हैं।
तुर्की की सरकार ने अब तक इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि मिस्र की सरकार ने कहा है कि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का सम्मान करते हैं और इसलिए इस प्रकार की यात्राओं को नियंत्रित करना उनका अधिकार है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मध्य-पूर्वी देशों में समलैंगिकता को लेकर सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण में बड़ा फर्क है और यह बदलाव उनके पर्यटन नीति पर भी असर डाल रहा है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समलैंगिक यात्रियों को अक्सर इन देशों में छिपकर या सावधानी से यात्रा करनी पड़ती है। कई बार उन्हें सुरक्षा की कमी और भेदभाव का सामना भी करना पड़ता है। इस संकट ने पर्यटकों के बीच चिंता बढ़ा दी है कि क्या वे बिना जोखिम के इन देशों में यात्रा कर सकते हैं या नहीं।
हालांकि, इस क्रूज की आयोजन समिति ने आश्वासन दिया है कि वे LGBT यात्रियों की सुरक्षा और आराम का पूरा ध्यान रखेंगे और भविष्य में भी ऐसी बाधाओं को पार करने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाशेंगे।
इस पूरे मुद्दे ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि क्या धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के नाम पर मनुष्यों के बुनियादी अधिकारों को दरकिनार किया जाना चाहिए या नहीं। यह विवाद मध्य पूर्व देशों में समलैंगिक लोगों के अधिकारों के लिए हो रहे संघर्षों का प्रतिबिंब भी है।
आने वाले सप्ताहों में इस विषय पर और बहस हो सकती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ध्यान दे रहा है कि कैसे ये देश अपने पर्यटन क्षेत्रों को खुला और समावेशी बनाएंगे।











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