गुवाहाटी, असम। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि गृह साम्प्रदायिकता को समाप्त करने और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हाल ही में प्रस्तुत किया गया यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस बिल को पारित करके सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह समाज के हर तबके के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य है एक समावेशी समाज बनाना, जहां अल्पसंख्यकों की महिलाओं को पूर्ण सम्मान और न्याय मिले। UCC बिल इसके लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने कहा कि यह बिल न केवल कानून की समानता लाएगा बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देगा।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि UCC बिल महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करेगा और उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, “इस बिल के माध्यम से हम महिला अधिकारों को सुरक्षित करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय सुनिश्चित कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि सभी समुदायों की महिलाएं समान अधिकारों के साथ न्याय पाएं।”
विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएँ भी मिली हैं, जहां कई ने इस कदम को सराहा है जबकि कुछ ने इसके सुधार की आवश्यकता जताई है। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार तैयार है अपने सभी नागरिकों की चिंताओं को सुनने और आवश्यक बदलाव करने के लिए।
असम सरकार की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर एक नई मिसाल कायम कर सकती है। हिमंता बिस्वा सरमा ने उम्मीद जताई कि इस बिल के लागू होने से सभी समुदायों के बीच एकता और मेलजोल बढ़ेगा।
सरकार लगातार यह साबित कर रही है कि वह विकास और सामाजिक न्याय दोनों में संतुलन बनाए रखना जानती है। UCC बिल की टेबलिंग इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के अधिकारों को एक नया आयाम दे सकता है।











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