Monday, October 26, 2026 1 live visitors
D/DNA News D/DNA Newsddnanews.com
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
विज्ञापन
DDNA header banner
DDNA header banner
तमिल नाडु विधानसभा सभापति जे.सी.डी. प्रभाकर के फैसले ने 2017-18 के 11 AIADMK विधायकों के अनुभव को याद दिलाया

तमिल नाडु विधानसभा सभापति जे.सी.डी. प्रभाकर के फैसले ने 2017-18 के 11 AIADMK विधायकों के अनुभव को याद दिलाया

D
D/DNA News Desk 10 जून 2026, 03:22 IST
1 मिनट पढ़ें
तमिल नाडु विधानसभा सभापति जे.सी.डी. प्रभाकर के फैसले ने 2017-18 के 11 AIADMK विधायकों के अनुभव को याद दिलाया

चेन्नई, तमिल नाडु – तमिल नाडु विधानसभा के सभापति जे.सी.डी. प्रभाकर के हालिया निर्णय ने 2017-18 में 11 AIADMK विधायकों के साथ हुए विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस फैसले ने उस समय के विधानसभा स्पीकर पी. धनपाल के उस निर्णय को याद दिलाया है, जब उन्होंने विधायकों के खिलाफ विधायिका की कार्यवाही रोक दी थी।

2017 में जब 11 AIADMK विधायकों को अयोग्यता के खतरे का सामना करना पड़ा था, उस समय तमिल नाडु विधानसभा के स्पीकर पी. धनपाल ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस फैसले के कारण विधायकों को बड़ी राहत मिली थी। इसके बाद यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय पहुंचा, जिसने विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को खारिज कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि स्पीकर का निर्णय अंतिम है और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।

वर्तमान में जब जे.सी.डी. प्रभाकर ने समान परिस्थितियों में निर्णय लिया है, तो कई राजनीतिक और विधिक जानकार इसे पूर्ववर्ती घटनाओं का एक महत्वपूर्ण संदर्भ मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा स्पीकर के पद पर बैठे व्यक्ति की संवैधानिक भूमिका और निर्णय का महत्व बहुत अधिक होता है, खासकर जब विधायकों की अयोग्यता जैसे संवेदनशील विषय सामने हों।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दोनों घटनाएं तमिल नाडु के राजनीतिक परिदृश्य में विधानसभा स्पीकर के अधिकार और निर्णय प्रक्रिया की जटिलताओं को दर्शाती हैं। इसके साथ ही, न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन और भी महत्वपूर्ण साबित होता है।

समाचार एजेंसियों एवं राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, जे.सी.डी. प्रभाकर के इस फैसले से संबंधित विवाद भविष्य में भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बने रहने की संभावना है। जनता और विपक्ष के बीच भी इस विषय पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

इस विषय पर विशेषज्ञ बैठकें और चर्चा जारी हैं, जो तमिल नाडु की विधानसभा संबंधी नियमों एवं नए राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को समझने में मदद करेंगी। विधानसभा के स्पीकर का यह दायित्व है कि वह निष्पक्ष और संवैधानिक दृष्टिकोण से निर्णय लें, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।

अंततः, 2017-18 के AIADMK विधायकों के मामले और वर्तमान फैसले के बीच समानता न केवल राजनीति बल्कि कानून के दृष्टिकोण से भी गहरा महत्व रखती है। इस तरह के फैसले राज्य की राजनीतिक स्थिरता और न्यायिक प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

Source

यह खबर शेयर करें

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।

संबंधित खबरें

--:--
ईरान युद्ध अपडेट: ट्रम्प ने ईरान हमलों को तेज करने पर कैबिनेट के साथ की बैठकJENPAS UG परिणाम 2026 घोषित, wbjeeb.nic.in पर उपलब्ध; Rank Card डाउनलोड करें, काउंसलिंग शेड्यूल जल्द घोषित होगाबर्मिंघम फीनिक्स ने एडगबास्टन में ट्रेंट रॉकेट्स को पछाड़ाजेम्स ज़ी ने अपने बेटे होने का दावा करने वाले व्यक्ति की गॉडमदर से $119,000 वापस लेने की कोशिश कीअमेरिका ने व्यापार भागीदारों पर नई टैरिफ लहर लागू कीऑस्मानिया विश्वविद्यालय ने मई 2026 के यूजी CBCS नियमित और बैकलॉग परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए; यहां से डाउनलोड करेंसीए प्रमुख ग्रीनबर्ग भारत में इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट को लेकर ‘खुले’‘जन नायक’ ने बॉक्स ऑफिस पर किया जोरदार आगाज