चेन्नई, तमिलनाडु – ऊर्जा संसाधन और विधि मंत्री आर. निर्मलकुमार ने मंगलवार को एक प्रमुख बयान में कहा कि टीवीके विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन चेन्नई के लिए हवाईअड्डा बनाने के लिए जलाशयों और उपजाऊ भूमि को नष्ट क्यों किया जाए। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण की रक्षा और कृषि भूमि के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निर्मलकुमार ने कहा, “यह आवश्यक है कि हम प्रगति करें, लेकिन प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना। जलाशय और खेती के लिए उपयुक्त जमीन हमारे भविष्य के लिए अनिवार्य हैं। हम लंबे समय तक ऐसे संसाधनों की सुरक्षा करें तभी विकास स्थायी होगा।” उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब तमिलनाडु सरकार पारंदूर में नए हवाईअड्डे के लिए जगह तलाश रही है, जिसके कारण व्यापक आलोचना हो रही है।
इस प्रस्तावित हवाईअड्डा योजना के कारण स्थानीय किसान और पर्यावरण कार्यकर्ता चिंतित हैं। उनका तर्क है कि पारंदूर क्षेत्र में निर्माण से प्राकृतिक जलाशयों का विनाश होगा और कई एकड़ उपजाऊ भूमि तबाह होगी। मंत्री ने इन चिंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार उचित अध्ययन और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी।
विधायक ने यह भी कहा कि चेन्नई के विकास के लिए नए हवाईअड्डे की आवश्यकता है, लेकिन यह परियोजना पारिस्थितिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से बिल्कुल संतुलित होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि सरकार पर्यावरण संरक्षण कानूनों का पालन करते हुए एक ऐसे विकल्प को चुनेगी जो विकास के साथ-साथ प्रकृति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि चेन्नई जैसे बड़े महानगर के लिए विस्तार योग्य और पर्यावरण अनुकूल हवाईअड्डा बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए स्थायी समाधान निकालना होगा जो स्थानीय समुदायों की जरूरतों और पर्यावरण की रक्षा दोनों को ध्यान में रखे। मंत्री निर्मलकुमार का बयान इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो विकास तथा पारिस्थितिकी के बीच संतुलन की नींव रख सकता है।
सरकार ने फिलहाल पारंदूर में हवाईअड्डे के निर्माण को लेकर किसी भी अंतिम निर्णय से इनकार किया है और साथ ही नए विकल्प खोजने के लिए एक समिति गठित की है। यह कदम स्थानीय स्तर पर व्याप्त असंतोष और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का संकेत है।











टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।